मेरठ के ब्रह्मपुरी क्षेत्र की समर गार्डन कॉलोनी में कमरे का मंजर देखकर समा की चीख निकल गई। वह गुरुवार दोपहर को चाची के घर कुछ सामान लेने गई थी लेकिन वहां उसे कोई नजर नहीं आया।
कमरे में खून से लथपथ जमीन पर पड़ी थीं चाची और तीन बहनें, भयावह मंजर देख निकली समां की चीख
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कमरे का मंजर देखकर अतीक की भतीजी समा की चीख निकल गई। दोपहर साढ़े तीन बजे समा सामान लेने चाचा के घर गई थी। जहां पर सन्नाटा था। समा ने अपनी चाची और चचेरी बहनों को आवाज दी, लेकिन कोई नहीं बोला।
वह थोड़ी डर गई, लेकिन वह फिर भी हिम्मत करते हुए उनके कमरे में पहुंची। वहां चाची और बहनें खून से लथपथ जमीन पर पड़ी थीं। उनके पास खून से सना ब्लेड और कैंची पड़ी थी। चीख-पुकार की आवाज सुनकर लोगों की भीड़ इकट्ठा हो गई।
पुलिस का मानना है कि यह वारदात करीब दो बजे हुई है। दोपहर करीब 12 बजे अतीक घर से गया था। तीनों बहनें एक कमरे में खेल रही थीं। आसमा ने पहले तीनों को कमरे में अंदर बंद कर लिया और फिर एक-एक कर बेटियों के गले पर वार किया। एक बच्ची की मौके पर ही मौत हो गई।
होश में आने के बाद एक बच्ची ने इस पूरी घटना की जानकारी पुलिस को दी। खून ज्यादा बहने के चलते आसमा की हालत गंभीर बनी हुई है। डॉक्टरों का कहना है कि छोटी बच्ची की मौत भी ज्यादा खून बहने से हुई है।
आठ साल से थी बीमार, दो बार कर चुकी प्रयास
पुलिस के अनुसार आसमा आठ साल से बीमार थी और दो बार अपने बच्चों को मारने का प्रयास कर चुकी थी। इसकी जानकारी अतीक व उसके परिजनों को भी है। इसके बावजूद तीनों बच्चियों को आसमा के पास छोड़ा गया। बताया जा रहा है कि आसमा मानसिक रूप से बीमार थी और उसका इलाज चल रहा था।
डीआईजी की कोठी के पास घटना
यह घटना डीआईजी की कोठी के पास हुई है। यह सुनकर पुलिस प्रशासन के आला अधिकारियों में खलबली मच गई। अधिकारियों ने घटना के बारे में जानकारी ली। पता चला कि ब्रह्मपुरी थाना क्षेत्र में एक इलाका डीआईजी की कोठी के नाम से मशहूर है।
उसके पास ही समर कॉलोनी है, जिसमें घटना हुई है। पुलिस का दावा कि क्षेत्र की स्थिति सामान्य है। वहां के सभी लोग जानते हैं कि आसमा बीमार थी और उसने घटना की है।