मेरठ के शोभापुर गांव के मोनू गुर्जर हत्याकांड को आशीष गुर्जर मर्डर केस की तरह फुलप्रूफ प्लानिंग के साथ अंजाम दिया गया। पुलिस कस्टडी में हत्यारोपी ईशू ने इसका खुलासा किया कि उसे मोहरा बनाकर मोनू को शराब पार्टी के बहाने घर से बुलाया गया था। ईशू का दावा है कि गोपी पारिया के भांजे बजरंग ने उससे कहा था कि होली पर मोनू को गांव में लेकर आना। जिससे माना जा रहा है कि मोनू की हत्या गोपी पारिया की हत्या के बदले की गई। आगे स्लाइड्स में जानें आखिर कैसे जातीय टकराव में तीसरी हत्या को खौफनाक तरीके से अंजाम दिया गया: -
शोभापुर में जातीय टकराव में तीसरी हत्या, गिरफ्तार ईशू ने खोले राज, कैसे हुआ मोनू गुर्जर का मर्डर
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सोमवार सुबह थाना कंकरखेड़ा में हत्यारोपी ईशू ने पुलिस के सामने बताया कि गोपी का रिश्तेदार बजरंग पहले ही आशीष गुर्जर व मनोज गुर्जर के परिवार के लोगों को गोपी की हत्या का बदला लेने की धमकी दे चुका था। बजरंग, ईशू और नीशू में दोस्ती थी, जबकि मोनू की सिर्फ ईशू से ही दोस्ती थी। ईशू का दावा है कि बजरंग ने उससे कहा था कि मोनू के साथ पहले होली की पार्टी करेंगे और फिर उसकी हत्या कर देंगे।
गांव में गिल्ली डंडा खेला, शराब पी
ईशू ने पुलिस को बताया कि प्लानिंग के तहत 20 मार्च की सुबह करीब 10 बजे वह मोनू गुर्जर पुत्र मांगेराम के घर पहुंचा था। उसे खेलने के बहाने घर से बुलाकर ले आया। उसके बाद दोनों ने गांव के मैदान में गिल्ली डंडा भी खेला था।
इस दौरान ही गोपी पारिया का रिश्तेदार बजरंग और बजरंग का दोस्त नीशू स्पेलेंडर बाइक से वहां पर पहुंचे थे। जिसके बाद वह (ईशू) अपनी बाइक पर मोनू को लेकर दायमपुर गांव की ओर चल दिया। पीछे-पीछे बजरंग और नीशू भी पहुंच गए थे। यहां एक पूर्व पार्षद के घर चारों ने शराब पी थी।
जंगल में ले जाकर हत्या
बकौल ईशू शाम होते ही वह मोनू को शराब पार्टी की बात कहकर जंगल में ले गए थे। वहां हम तीनों ने शराब नहीं पी बल्कि मोनू को जबरन शराब पिलानी शुरू कर दी। जब उसने विरोध किया तो तीनों उस पर टूट पड़े थे। ईंटों से चेहरे व सिर को कुचलकर मोनू को मौत के घाट उतार दिया था। पहचान मिटाने के लिए बाइक से पेट्रोल निकालकर मोनू के शव पर छिड़ककर आग लगा दी थी।
मेरे कानों में गूंजती रही थी चीख-पुकार
ईशू ने बताया कि मोनू को चिल्लाता देखकर वह इतना डर गया था कि मौके से भागकर अपने घर पहुंच गया था। मोनू की चीख पुकार रात भर उसके कानों में गूंजती रही। 21 मार्च की सुबह वह रिश्तेदारी में भाग गया था। रविवार को मोनू के शव की शनाख्त होने पर जब पुलिस उसके घर पहुंची तो मेरे पिता ने मुझे वहां बुलाया था। जहां मैंने पुलिस को सब सच-सच बता दिया था।