उत्तर प्रदेश के बागपत में बुधवार को रुक-रुककर 12 घंटे तक हुई, बारिश से आम जन जीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया। रोशनगढ़, माल माजरा, जिवाना गुलियान में मकान की दीवार गिर गई।
भड़ल में घरों में पानी भर गया। परिवार के लोगों ने दूसरी जगह पहुंचकर जान बचाई। बड़ौत की सड़कों पर जलभराव से हालात मुश्किल हो गए।
बुधवार सुबह करीब साढ़े चार बजे से जिले में बरसात शुरू हुई, जो रुक-रुककर करीब 12 घंटे तक होती रही। कृषि विज्ञान केंद्र खेकड़ा के कृषि वैज्ञानिक डॉ संदीप कुमार का कहना है कि करीब 26 मिलीमीटर बरसात हुई। तापमान में चार डिग्री की गिरावट दर्ज की गई है। इससे लोगों को गर्मी से राहत मिल गई।
बरसात के कारण बाजार सूने पड़े रहे। ग्राहकों की आवाजाही नहीं हो सकी। बड़ौत के मुख्य मार्गों पर जलभराव हो गया। कई दुकानों तक भी पानी पहुंच गया। मार्गों से गुजर रहे वाहनों का गुजरना भी मुश्किल हो गया।
देहात क्षेत्र में गलियां तरणताल बन गई। घरों में पानी भर गया। जलनिकासी की व्यवस्था नहीं होने से देहात क्षेत्र का जन जीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त रहा।
गन्ने और धान के लिए बरसा सोना
बरसात से गन्ने और धान की फसल को लाभ होगा। कृषि विज्ञान केंद्र खेकड़ा के प्रभारी डॉ गजेंद्र पाल सिंह का कहना है कि अब किसानों को कई दिन तक धान में सिंचाई की जरूरत नहीं पड़ेगी।
खेतों में पानी पर्याप्त है। किसानों को सलाह दी है कि गन्ने के खेतों की सिंचाई की जल्दी न करें। क्योंकि अगर हवा चली तो फसल के गिरने का खतरा पैदा हो जाएगा। बारिश से दाल और सब्जी की फसलों को नुकसान हो सकता है।
जिले में हाईवे पर जलनिकासी नहीं
दिल्ली-सहारनपुर हाईवे और बड़ौत-मुजफ्फरनगर हाईवे पर जलनिकासी की व्यवस्था नहीं होने से हालात मुश्किल हो गए। सहारनपुर हाईवे पर सिसाना में जलभराव के हालात हैं। इसके अलावा बुढ़ाना में भड़ल और दाहा गांव के बीच जलभराव की स्थिति बनीं हुई है।
गोशालाओं में भी हुआ जलभराव
जिले में कई जगह जलभराव के हालात बन गए। गोशालाओं में जलभराव रहा। ग्रामीणों ने जलनिकासी कराने की मांग की है।