समय दोपहर के 3:40 बजे। मेडिकल इमरजेंसी में पुलिस तीन घायलों को लेकर पहुंचती है। अचानक वहां मेडिकल और गंगानगर पुलिस की हलचल बढ़ जाती है। पुलिस फोर्स को देखकर इमरजेंसी में तीमारदार और अन्य लोग भी हैरान हैं। तभी पुलिस बताती है कि तीनों घायल गंगानगर में लूट करने वाले बदमाश हैं। पुलिस मुठभेड़ के घायल हुए हैं। स्ट्रेचर पर घायल सतेंद्र फौजी, भोलू और इरशाद चुपचाप लेटे हैं। नर्स और अन्य स्टाफ उनका उपचार शुरू कर देते हैं।
पुलिस मुठभेड़ पर उठे सवाल: पैर में गोली लगने का बस नाम, बदमाश खुद कर रहे सारे काम
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मेडिकल स्टाफ घायलों से पूछता है, गोली कहां लगी है। इस पर घायल चुप रहते हैं। वहां मौजूद दरोगा बताते हैं, गोली इनके पैर में लगी है। तभी एक घायल बदमाश बाएं पैर में हल्का सा निशान दिखाता है, देखकर नहीं लगता कि गोली लगी हो। डॉक्टर उसको पट्टी बांध देते हैं। इसके बाद यह घायल बदमाश उठकर फर्श पर बैठ जाता है। पुलिस उससे कहती है, अभी एक्सरे होगा। इसके बाद घायल बदमाश हाथ में लाल रंग की पर्ची लेकर लंगड़ाते हुए एक्सरे रूम की तरफ जाता है। पीछे दरोगा और सिपाही हैं।
भोलू के परिजनों ने किया हंगामा
घायल बदमाश भोलू के परिजनों ने शनिवार शाम चार बजे मेडिकल कॉलेज में हंगामा किया। इस दौरान ग्रामीणों और परिजनों ने कहा कि युवक पर कोई अपराध दर्ज नहीं है। कुछ समय पहले ही बीमारी से उसके भाई की मौत हो गई थी। शुक्रवार रात भोलू घर पर था। शनिवार दोपहर 12 बजे पुलिस घर से उठाकर लाई। जब वह गंगानगर पहुंचे तो पुलिस ने कुछ नहीं बताया। बाद में पता चला कि वह मेडिकल में भर्ती है और मुठभेड़ में घायल है। वहीं सतेंद्र फौजी के परिजनों ने सरधना में हंगामा किया।
कोई भी मीडिया कर्मी न घुसने पाए
इस बीच वहां मौजूद कुछ लोग मोबाइल से वीडियो बनाने लगते हैं तो पुलिस उनसे मोबाइल छीनने की कोशिश करती है। तभी कुछ पुलिस अधिकारी वहां पहुंचते हैं। वह कहते हैं कि अंदर कोई भी मीडिया कर्मी न घुसने पाए। इस दौरान कुछ लोग में चर्चा होती है कि आखिर पुलिस ऐसा निशाना कैसे लगाती है, जो तीनों बदमाशों के घुटने से नीचे ही गोली लगी है। पुलिस पर सवाल उठते ही अधिकारी धमकाकर भीड़ को खदेड़ देते हैं। ऐसे में पुलिस ने मुठभेड़ की जो पटकथा तैयार की है, वह सवालों के घेरे में है।
शुक्रवार रात 8:30 बजे गंगानगर एपेक्स कांपलेक्स में कृष्णा मेडिकल स्टोर और 9:50 बजे सीएनजी पंप पर हथियारों से लैस बदमाशों ने डकैती डाली। एक घंटा बदमाशों ने कहर बरपाया था। मामला लखनऊ तक पहुंचा, तब जाकर मेरठ पुलिस की नींद टूटी। जिले में नाकाबंदी कर चेकिंग अभियान चलाया गया था। जिसका परिणाम बेहतर रहा।