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Pics: 17 दुश्मनों को ढेर कर शहीद हुए थे योद्धा योगेंद्र सिंह, आखिरी चिठ्ठी में लिखी थी दिल की बात

Thu, 26 Jul 2018 09:14 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Updated Thu, 26 Jul 2018 09:14 AM IST
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Pics: grenadier Yogendra Singh martyr after killing 17 enemies
शहीद ग्रेनेडियर योगेंद्र सिंह का परिवार - फोटो : अमर उजाला

'मैं ठीक-ठाक हूं। कारगिल में लड़ाई छिड़ गई है। मुझे पहाड़ों पर जाना पड़ रहा है। हम लोग वहां के लिए रवाना हो गए हैं। कोई भी दिल छोटा मत करना..., डरने की कोई बात नहीं है। मेरे साथ पूरी यूनिट है। दुश्मनों को मारकर मैं वापस आऊंगा।' शहीद ग्रेनेडियर योगेंद्र सिंह यादव की ये वो आखिरी चिट्ठी थी, जो उन्होंने कारगिल जाने से कुछ देर पहले लिखी थी। चिट्ठी घर पहुंचने के कुछ दिनों बाद ही ग्रेनेडियर योगेंद्र सिंह यादव के शहीद होने का संदेश आ गया। 17 दुश्मनों को मारकर ग्रेनेडियर योगेंद्र सिंह टाइगर हिल पर शहीद हो गए। उनके इस अदम्य साहस और शौर्य के लिए उन्हें मरणोपरांत सेना मेडल से सम्मानित किया गया। जानिए, उनसे जुड़ी ये खास बातें...

17 दुश्मनों कोे उतार दिया मौत के घाट

Pics: grenadier Yogendra Singh martyr after killing 17 enemies
शहीद ग्रेनेडियर योगेंद्र सिंह - फोटो : अमर उजाला

बात जून 1999 की है। हस्तिनापुर निवासी ग्रेनेडियर योगेंद्र सिंह यादव की तैनाती उस वक्त जम्मू में थी। कारगिल में लड़ाई छिड़ी तो उनकी बटालियन 18 ग्रेनेडियर को कारगिल पहुंचने का आदेश हुआ। योगेंद्र सिंह भी बटालियन के साथ रवाना हो गए। टाइगर हिल से दुश्मन को खदेड़ने में दिक्कत आ रही थी। उनके पास हैवी इनफैंट्री गन के साथ मिसाइल गन भी थी। 18 हजार फीट की ऊंचाई पर बैठे पाकिस्तानी सैनिकों ने ज्यादा नुकसान भारतीय सेना को यहीं पहुंचाया। ग्रेनेडियर योगेंद्र सिंह ने अपने सात साथियों के साथ प्वाइंट पर पहुंचकर पाकिस्तानी सैनिकों के बंकरों को ध्वस्त कर दिया। दुश्मन के 17 जवानों कोे मौत के घाट उतार दिया। पांच जुलाई की शाम दुश्मन की जवाबी गोलीबारी में ग्रेनेडियर योगेंद्र सिंह यादव शहीद हो गए।

भाई भी गया सेना में 

Pics: grenadier Yogendra Singh martyr after killing 17 enemies
शहीद ग्रेनेडियर योगेंद्र सिंह - फोटो : अमर उजाला

ग्रेनेडियर योगेंद्र सिंह यादव को शुरू से ही सेना में जाने का जज्बा था। एक भर्ती में फेल हुए तो उन्होंने दोबारा तैयारी शुरू कर दी। वह कहा करते थे कि नौकरी करो तो सेना में करो। अपने छोटे भाई महिपाल सिंह को भी उन्होंने सेना में भर्ती कराया। लेकिन अफसोस कि भाई का जब नंबर आया तो कुछ दिन पहले ही वो शहीद हो गए। योगेंद्र सिंह यादव के पूरे परिवार ने महिपाल से उनकी इच्छा पूरी करने को कहा। वह आजकल 18 ग्रेनेडियर दिल्ली में तैनात हैं।

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मेडल घोषणा में हुई चूक 

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शहीद ग्रेनेडियर योगेंद्र सिंह - फोटो : अमर उजाला

शहीद ग्रेनेडियर योगेंद्र सिंह के भाई सुशील बताते हैं कि उन्हें एक मलाल ताउम्र रहेगा। जब योगेंद्र सिंह शहीद हुए तो मरणोपरांत उनको परमवीर चक्र देने की घोषणा की गई। लेकिन उनकी जगह सूबेदार योगेंद्र सिंह यादव को परमवीर चक्र दे दिया गया। बाद में कहा गया कि दोनों के नाम एक होने की वजह से ऐसा हो गया था। शहीद योगेंद्र सिंह को मरणोपरांत सेना मेडल से नवाजा गया। सुशील बताते हैं कि उन्हें नहीं पता कि वो सेना की गलती रही या सरकार की। 

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महज आठ साल की थी बड़ी बेटी 

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शहीद ग्रेनेडियर योगेंद्र सिंह - फोटो : अमर उजाला

शहीद योगेंद्र सिंह की पत्नी वीर नारी उर्मिला देवी बताती हैं जब वो शहीद हुए तो बड़ी बेटी ज्योति आठ साल की थी। बेटा संदीप सात और दीपक चार साल का था। आखिरी खत लड़ाई के दौरान भेजा था। लिखा था कि युद्ध शुरू हो गया है। लेकिन घबराना मत। दुश्मनों को मारकर ही वापस आऊंगा। लेकिन वो नहीं लौटे। गोलियों से छलनी उनका पार्थिव शरीर आया।

शहीद योगेंद्र सिंह की बेटी की शादी हो चुकी है। बड़ा बेटा गैस एजेंसी का काम देखता है। छोटा बेटा दीपक एमएससी कर रहा है। दोनों बेटे कहते हैं कि उन्हें अपने पिता पर फख्र है कि उन्होंने देश के लिए जान दी। 

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