शामली के जलालाबाद में पकड़े गए म्यांमार के चार लोगों में से तीन भाइयों का थाईलैंड में आलीशान मकान है और इनके पिता का व्यापार भी है। इनके परिवार का म्यांमार से 2013 से 2018 तक थाईलैंड में आना जाना लगा रहा है। ऐसे में इनका जलालाबाद जैसे छोटे कस्बे में एक मदरसे में शिक्षा लेना कई सवाल खड़े कर रहा हैं।
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पकड़े गए आरोपी
- फोटो : अमर उजाला
यहां इनका सरपरस्त कौन है, जिसकी मदद से इन्होंने भारतीय दस्तावेज हासिल किए, इन सब सवालों का जवाब तलाशने के लिए पुलिस और खुफिया एजेंसियां जांच में जुटी है। म्यांमार दूतावास और उच्चायुक्त शरणार्थी कार्यालय से भी संपर्क किया जा रहा है।
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पकड़े गए आरोपी
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पकड़े गए छात्रों नोमान अली, मोहम्मद रिजवान खान, मोहम्मद फुरकान हुसैन निवासी पाबेडान थाना कोजेडान यंगून म्यांमार से पूछताछ में मिली जानकारियों को तस्दीक करने में पुलिस जुट गई है।
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शामली में स्थित मस्जिद
- फोटो : अमर उजाला
पुलिस अफसरों के मुताबिक तीनों भाइयों का परिवार काफी संपन्न है। पिता का म्यांमार में बिजनेस है। इन युवकों के एक भाई और एक बहन ओर है। अफसरों को ये बात चौंका रही है कि ये लोग इतने ही धनवान है तो जलालाबाद के मदरसे में आकर क्यों पढ़ रहे थे, पहचान क्यों छिपाई, सरकार से अनुमति लेने के बाद। किसी बड़े शहर या बड़े मदरसे में भी तालीम हासिल की जा सकती थी, इनके परिवार का 2013 से 2018 तक थाईलैंड में आना जाना लगा रहा। थाईलैंड में रहकर उन्होंने क्या किया? इसकी जानकारी अभी नहीं मिली है।
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शामली में स्थित मस्जिद
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बता दें कि गिरफ्तार तीनों भाइयों के रिश्तेदार मामा का भी शामली और आसपास के जिलों में आना जाना रहा है। मामा का ही संपर्क पकड़े गए रोहिंग्या अब्दुल मजीद से हुआ था। मामा के कहने पर ही अब्दुल मजीद ने तीनों भाइयों को जलालाबाद के मदरसे में दाखिला दिलाया था। पुलिस इस बात का भी पता लगा रही है कि अब्दुल मजीद ने हाल ही में जलालाबाद में जो मकान खरीदा है, उसमें इन छात्रों के रिश्तेदार मामा ने ही तो उसकी आर्थिक मदद नहीं की।