जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती के पिता मुफ्ती मोहम्मद सईद की राजनीति मुजफ्फरनगर से ही परवान चढ़ी थी। जिले की जनता ने बिना यह सोचे कि वह कश्मीर के हैं, यहां से सांसद बनाया।
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पूर्व मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद और उनकी बेटी रूबिया सईद
- फोटो : फाइल, अमर उजाला
सांसद ही नहीं वह देश के पहले मुस्लिम गृहमंत्री बने और कश्मीर की राजनीति में छा गए। जम्मू-कश्मीर के दो बार सीएम रहे। बेटी रूबिया के अपहरण में आतंकियों को छोड़ने से नाराज जिले की जनता ने दोबारा चुनाव लड़ने पर उन्हें हरा दिया।
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मुफ्ती मोहम्मद सईद
- फोटो : अमर उजाला
मुजफ्फरनगर जिले की जनता ने धर्म और क्षेत्र के आधार पर कभी भेदभाव नहीं किया, लेकिन बात देश की आई तो करारा जवाब दिया। कश्मीर के मुफ्ती मोहम्मद सईद इसके सबसे बड़े उदाहरण हैं। 1989 में मुफ्ती मौहम्मद सईद जनता दल के टिकट पर मुजफ्फरनगर से चुनाव लड़े। यहां की जनता ने बिना किसी भेदभाव के उन्हें काफी मतों से जिताया।
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महबूबा मुफ्ती
- फोटो : अमर उजाला
सईद को तीन लाख 35 हजार 324 मत मिले और उनके मुकाबले आनंद प्रकाश त्यागी एक लाख 76 हाजर 337 मत मिले। इतना ही नहीं तत्कालीन प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह ने उन्हें गृहमंत्री बना दिया। किसी कश्मीरी के लिए आजाद भारत में यह सबसे बड़ा पद था।
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जम्मू में तैनात जवान
- फोटो : अमर उजाला
गृह मंत्री बनने के कुछ माह बाद ही कश्मीर में बेटी रुबिया के अपहरण के बदले सईद ने आतंकी छोड़े तो जनता में आक्रोश पैदा हुआ। देश की बात पर लोग उनके विरोध में आ गए। यहीं कारण रहा कि 1991 के लोकसभा चुनाव में वह भाजपा के नरेश बालियान से चुनाव हार गए। बालियान को दो लाख 71 हजार 639 और सईद को एक लाख 75 हजार 987 मत मिले।