पश्चिमी यूपी में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई का एक बार फिर नेटवर्क जुड़ा होने के संकेत मिले हैं। पूर्व में ऐसे कई संदिग्ध यहां से गिरफ्त में आए हैं, जिनके पास से अति महत्वपूर्ण और गोपनीय दस्तावेज मिल चुके हैं।
मेरठ से एक और संदिग्ध के पकड़े जाने के बाद एक बार फिर यह सामने आया है कि यहां आईएसआई की जड़ें काफी गहरी हो चुकी हैं। जिस चांद को इस बार सोतीगंज से पकड़ा गया है वह पाकिस्तान में काफी लंबे बातें किया करता था। उसके पकड़े जाने के बाद सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट हो गईं हैं।
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पूर्व में पकड़े गए अफसार के घर पूछताछ करती एनआईए की टीम
आईएसआई एजेंटों का पश्चिमी उत्तर प्रदेश से काफी पुराना नाता रहा है। करीब 15 वर्ष पूर्व 18 मार्च 2004 में मेरठ में आईएसआई एजेंट के रूप में एक महिला रूबी बेगम को एटीएस ने गिरफ्तार किया था। पूछताछ की गई, जिसके बाद कई महत्वपूर्ण जानकारियां हाथ लगीं। 10 मार्च 2005 को खलील हुसैन खान नाम का एजेंट मेरठ में पकड़ा गया।
आईएसआई एजेंटों का टारगेट था कि वे मेरठ कैंट की अधिकांश गोपनीय जानकारियां जुटाकर पाकिस्तान भेजें और इसमें काफी हद तक वे काम भी कर चुके थे। 16 अगस्त 2014 को आईएसआई एजेंट आसिफ सेना के हत्थे चढ़ा।
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एनआईए टीम
- फोटो : अमर उजाला
30 नवंबर, 2015 को एसटीएफ ने आईएसआई एजेंट एजाज को यहां से गिरफ्तार किया। उसके बाद किठौर में हथियार बनाने वालों का कनेक्शन आईएसआईएस से जुड़े होने की जानकारी मिली। जिसके बाद एटीएस और एनआईए ने कई दिनों तक मेरठ में डेरा डाला था। तीन संदिग्ध युवकों को पकड़ा था। जिसमें पुष्टि हुई थी हथियार सप्लायरों के आतंकियों से संबंध हैं।