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जन्मदिवस: चौधरी चरण सिंह के दिल में बसे थे गांव, गरीब और किसान, राजनीति में युवाओं को बढ़ाया आगे

Sun, 23 Dec 2018 11:03 AM IST
दुष्यंत शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बागपत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बागपत Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sun, 23 Dec 2018 11:03 AM IST
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Chaudhary Charan Singh from baghpat lived for up village poor and the farmers
बड़ौत में सभा को संबोधित करने जाते पूर्व प्रधानमंत्री चरण सिंह। -फाइल फोटो

पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय चौधरी चरण सिंह गांव, गरीब और किसानों के लिए मसीहा थे। किसान घर में जन्मे और ताउम्र किसानों की लड़ाई लड़ते रहे। युवाओं को राजनीति में आगे बढ़ाया। किसान-मजदूरों के दिल में बड़े चौधरी की अमिट यादें हैं। उनके साथ लंबे समय तक जुड़े रहे लोगों के पास कभी न खत्म होने वाली बातें। ईमानदारी उनकी पहचान रही, यही वजह है कि जिस दिन उनका निधन हुआ तब उनके खाते में सिर्फ 470 रुपये थे। 



पूर्व विधायक डा. महक सिंह बताते हैं कि चौधरी साहब बहुत ही गंभीर और विचारशील थे। वह अत्यंत ईमानदार थे और किसानों और कार्यकर्ताओं को साथ लेकर चलते थे। कार्यकर्ताओं को परिवार की तरह मानते थे। उन्होंने युवाओं को राजनीति में आगे बढ़ाया। 

Chaudhary Charan Singh from baghpat lived for up village poor and the farmers
डा. ओमवीर सिंह तोमर व प्रो. बलजीत सिंह आर्य

प्रो. बलजीत सिंह आर्य कहते हैं कि चौधरी चरण सिंह राजनीतिज्ञ के साथ-साथ समाज सुधारक भी थे और भ्रष्टाचार के खिलाफ थे। आर्य समाज का उनके जीवन पर गहरा असर था। अपने घर में रोजाना यज्ञ भी करते थे। डा. ओमवीर सिंह तोमर कहते हैं कि गरीब की आवाज बनकर खड़े होते थे।

बागपत का माया त्यागी कांड इसका ज्वलंत उदाहरण था। उन्होंने आंदोलन किया और उनके नेतृत्व में युवाओं ने संघर्ष करते हुए पुलिस की लाठियां तक खाई। नौरोजपुर गुर्जर गांव के रहने वाले जयपाल सिंह बताते हैं कि चौधरी चरण सिंह किसानों के चंदे से चुनाव लड़ते थे, उन्होंने कभी धनाढ्य लोगों की सहायता को स्वीकार नहीं किया।

 
 
Chaudhary Charan Singh from baghpat lived for up village poor and the farmers
पूर्व विधायक डा. महक सिंह

किसानों के बीच रोने लगे थे बड़े चौधरी
बागपत के छपरौली से पांच बार विधायक रहे नरेंद्र सिंह बताते हैं कि किसान के हित में चौधरी चरण सिंह जैसा बजट किसी ने नहीं दिया। वह सच्चे किसान नेता थे। इमरजेंसी के बाद पांच जनवरी 1977 को छपरौली में जनसभा हुई। देश के विभिन्न हिस्सों से दो लाख किसान पहुंच गए। भाषण के बीच में ही बड़े चौधरी की आंखों से पानी बहने लगा।

बड़े चौधरी ने वित्त मंत्री रहते हुए गांव के लिए 48 प्रतिशत बजट दिया था। यह आज भी उदाहरण है। उनका कहना था कि भ्रष्टाचार की शुरूआत ऊपर यानि ऊंचे पदों पर बैठे लोगों से होती है और वह धीरे-धीरे नीचे आता है और फिर संपूर्ण समाज को भ्रष्ट कर देता है।  

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Chaudhary Charan Singh from baghpat lived for up village poor and the farmers
Chaudhary Charan Singh

जब मासूम ने भेंट की थी गुल्लक 

चौधरी चरण सिंह एक बार दिल्ली से छपरौली जाते समय बागपत के राष्ट्रवंदना चौक पर रुके थे। यहां उनका जोरदार स्वागत हुआ। एडवोकेट देवेंद्र आर्य के पुत्र तब पांच वर्षीय वेदव्रत आर्य ने चौधरी साहब को राष्ट्रीय रक्षा कोष के लिए गुल्लक भेंट की थी।   


 
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Chaudhary Charan Singh from baghpat lived for up village poor and the farmers
छपरौली में 1981 में रालोद नेता सुखपाल सिंह पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह व पूर्व रक्षा मंत्री बाबू जगजीवन राम को खाना खिलाते हुए। फाइल फोटो

अभिलेखागार से जानिए चौधरी चरण सिंह को 
पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के जीवन के अनछुए पहलुओं से अब लोग घर बैठे ही रूबरू हो रहे हैं। दिल्ली की नेहरू लाइब्रेरी में संग्रहित उनकी किताबें, पत्र और भाषण इंटरनेट पर उपलब्ध हैं। बड़े चौधरी के नाती हर्ष सिंह लोहित ने इंटरनेट पर चौधरी चरण सिंह अभिलेखागार बनाया है।

चौधरी चरण सिंह की राजनीति, विचार, उनके पत्र, भाषण, तस्वीरें और राजनीतिक जीवन से जुड़ी अधिकतर चीजें अभिलेखागार पर अपलोड की गई हैं। उनकी पत्नी गायत्री देवी ने 1993 में किताबों की मूल प्रतियां और अन्य दस्तावेज नेहरू लाइब्रेरी दिल्ली को भेंट कर दिए थे।  

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