नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में हुआ बवाल कई परिवारों को जिंदगीभर का दर्द दे गया। पांच युवाओं ने जान गवां दी। कई परिवार ‘मुल्जिम’ बन गए। पुलिस और पब्लिक के बीच विश्वास का धागा भी टूटने की कगार पर है। अब इस विश्वास को मजबूत करने के लिए पुलिस व प्रशासन को काफी मशक्कत करनी होगी।
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पथराव करते उपद्रवी
- फोटो : अमर उजाला
पुलिस के प्रति इतना गुस्सा क्यों था, इसका जवाब किसी के पास नहीं है। चार घंटे बवाल हुआ, जिसमें पुलिस को गोलियां चलानी पड़ी। पांच लोगों की जान चलीं गई। मरने वाले आसिफ, मोहसिन, जहीर, आसिफ और अलीम को पुलिस ने उपद्रवी घोषित कर दिया। उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया। परिवार पर दोहरी मार पड़ी। बेटे की मौत भी हुई। उसके माथे पर उपद्रवी का ठप्पा भी लग गया।
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जमकर हुआ था पथराव किया
- फोटो : अमर उजाला
वहीं बवाल में परिवार के नाम भी आ रहे हैं। पुलिस व प्रशासन के रिकॉर्ड में हाशिमपुरा, मलियाना, शास्त्रीनगर एल ब्लाक हिंसा और अब इस बवाल को भी दर्ज कर लिया गया। यह ऐसा दाग है जो शायद ही मिटे।
कैसे होगा विश्वास कायम
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जमकर हुआ था पथराव
- फोटो : अमर उजाला
पुलिस और पब्लिक में कैसे समन्वय स्थापित होगा, इसको लेकर मंथन चल रहा है। पब्लिक पुलिस पर और पुलिस पब्लिक पर गोलियां चला रही थी। बवाल के दौरान दोनों एक दूसरे के दुश्मन थे। कभी ऐसा दौर था कि एक सिपाही ही आवाज देता था तो सब चुपचाप अपने घर वापस चले जाते थे। शुक्रवार को पुलिस टीम पर हमला बोला गया।
अब नजरिया भी बदल गया
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पथराव करते उपद्रवी
- फोटो : अमर उजाला
लिसाड़ीगेट में पांच हजार से अधिक लोगों के खिलाफ उपद्रव में मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस लिसाड़ीगेट के लोगों को मुल्जिम की नजर से देख रही है। पुलिस के जिन लोगों से अच्छे संबंध थे या शांति व्यवस्था बनाने की मीटिंग में जो भी लोग आते थे, उनमें भी विश्वास टूट रहा है। सोमवार को पुलिस ने कई लोगों को बुलाकर वीडियो और फोटो दिखाए। उपद्रवियों की पहचान कराई। जिसमें कोई परिचित या रिश्तेदार के नाम बताए जा रहे।