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पत्नी के हार्ट अटैक ने दिखाई इस शख्स को 'जीवन की सच्चाई', अब बन चुके हैं लावारिस लाशों के वारिस

Sat, 07 Jul 2018 05:01 PM IST
आनंद मिश्रा, अमर उजाला, हरदोई
आनंद मिश्रा, अमर उजाला, हरदोई Updated Sat, 07 Jul 2018 05:01 PM IST
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Wifes heart attack shown the truth of life to this man
लावारिस शव का अंतिम संस्कार कराते राजवर्धन।
कभी लोगों का दर्द न समझने वाले को वक्त ने ऐसी सीख दी उसने को उसने लावारिस शवों के अंतिम संस्कार का बीड़ा उठा लिया। सरकारी अस्पताल की मॉर्चरी और पोस्टमार्टम हाउस के कर्मचारी भी अब उनकी राह तकते हैं। उन्हें पुलिस की चिरौरी नहीं करनी पड़ती।
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अगली स्लाइड में पढेंः- अंतिम संस्कार का बीड़ा उठाने वाले शख्स के बारे में...
 

हम बात कर रहे हैं हरदोई के धर्मशाला रोड निवासी राजवर्धन सिंह उर्फ राजू की। वह गुरुवार तक 92 लावारिस शवों का अंतिम संस्कार करा चुके हैं। धर्मशाला रोड निवासी राजवर्धन सिंह कारोबारी हैं। उनकी छवि पहले एक दबंग की थी। झगड़ालू होने के कारण कोई उनके पास जाने से भी कतराता था। लेकिन जुलाई 2017 में पत्नी की तबीयत खराब होने पर उन्हें जीवन की सच्चाई पता चली और वह लोगों का दर्द समझने लगे। उनका हृदय परिवर्तन हो गया। राजवर्धन ने तब से जहां गोसेवा का संकल्प लेकर चुटहिल गायों के इलाज का बीड़ा उठाया। वहीं अक्टूबर आते-आते उन्होंने बेहद सकारात्मक और सामाजिक कार्य करना शुरू कर दिया। उन्होंने जिला अस्पताल की मोर्चरी और पोस्टमार्टम हाउस में आने वाले लावारिस शवों के अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी उठाई। एक अक्टूबर 2017 से गत गुरुवार तक वह 92 लावारिस शवों का अंतिम संस्कार मृतक के धर्म के मुताबिक करा चुके हैं। अब लावारिस शवों का अंतिम संस्कार कराने के लिए अस्पताल के कर्मचारियों को भटकना नहीं पड़ता है।

 अगली स्लाइड में पढेंः- इस तरह बदल गया राजवर्धन का जीवन...

 
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राजवर्धन बताते हैं कि जुलाई 2017 में वह पत्नी प्रीती सिंह और दोनों बच्चों पार्थवर्धन व समृद्धि के साथ यात्रा पर थे। यात्रा के दौरान दिल्ली में पत्नी प्रीती सिंह को हार्टअटैक पड़ा। वह पत्नी को लेकर दिल्ली के एक प्रतिष्ठित अस्पताल गए। दो दिन उपचार चला और वह ठीक हो गईं। इन दो दिनों में उन्होंने अस्पताल में जिंदगी का सच देख लिया। दो बच्चों के अलावा उनके साथ कोई नहीं था, जो मदद कर पाता। इसके बाद कुछ धार्मिक स्थलों का दर्शन कर उन्होंने अपने जीवन का सार बदल दिया। वह कहते हैं कि लावारिस शवों का अंतिम संस्कार कर उन्हें आत्म संतुष्टि मिलती है।  

अगली स्लाइड में पढेंः- 50 अंतिम संस्कार के बाद किया था पिंड दान... 
 
 
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राजवर्धन बताते हैं कि जब उन्होंने 50 लावारिस शवों का अंतिम संस्कार कर लिया तो वह पिंड दान के लिए हरिद्वार गए थे। उन्होंने पूरे विधि-विधान से पिंड दान की प्रक्रिया पूरी कराई और यह प्रक्रिया वह आगे भी जारी रखेंगे। 

अगली स्लाइड मे पढेंः- 72 घंटे बाद होता पोस्टमार्टम फिर डिस्पोजल...

 

राजवर्धन ने बताया कि जब कोई भी लावारिस शव पुलिस बरामद करती है, तो उसे शिनाख्त के लिए 72 घंटे तक मोर्चरी में रखा जाता है। इसके बाद उसका पोस्टमार्टम कराया जाता है। पुलिस की भाषा में कहे तो पोस्टमार्टम के बाद अज्ञात शव का डिस्पोजल कर दिया जाता है। डिस्पोजल से मतलब अंतिम संस्कार से है। अंतिम संस्कार कराने के लिए पुलिस को महज 2700 रुपये प्रति शव के हिसाब से मिलते हैं। इसमें 300 रुपये कफन के लिए, 2000 रुपये लकड़ी के लिए और 400 रुपये ढुलाई के होते हैं।
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