उन्नाव में पेट्रोल डाल जलाकर मारी गई दुष्कर्म पीड़िता की बहन ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि एक सप्ताह में न्याय चाहिए। जान के बदले जान चाहिए ऐसा नहीं हो सकता तो सरकार हमारी भी जान ले ले और पूरे परिवार की समाधि बनवा दे।
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उन्नाव दुष्कर्म पीड़िता की बहन बोली जान के बदले जान चाहिए नहीं तो पूरे परिवार की समाधि बनवा दे सरकार
Fri, 13 Dec 2019 12:16 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उन्नाव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उन्नाव
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Fri, 13 Dec 2019 12:16 PM IST
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दुष्कर्म पीड़िता की बहन
- फोटो : अमर उजाला
दुष्कर्म पीड़िता की बहन बोली जान के बदले चाहिए जान
- फोटो : अमर उजाला
उन्नाव के बिहार थाना क्षेत्र में पेट्रोल डाल जलाकर मारी गई दुष्कर्म पीड़िता की समाधि की सुरक्षा को लेकर पुलिस पूरी तरह अलर्ट है। मिट्टी से शव बाहर निकाले जाने के अंदेशे पर पुलिस ने समाधि स्थल के इर्द-गिर्द भटकने वालों के नाम पते की जानकारी के साथ उनकी फोटो खींचकर सुरक्षित करनी शुरू की है। गुुरुवार को भी परिवार का माहौल गमगीन रहा।
उन्नाव दुष्कर्म कांड में जेल भेजे गए पांच आरोपी (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
5 दिसंबर को दुष्कर्म पीड़िता को जलाए जाने और दिल्ली से सफदरगंज अस्पताल में उसकी मौत के बाद शव को गांव लाकर परिजनों की सहमति पर खेत में दफनाया गया था। सभी मांगें पूरी होने की जिद पर अड़े परिजनों ने बुधवार को समाधि स्थल पर धरना दिया था। गुरुवार को भी वह समाधिस्थल पर पहुंचे और कुछ देर रुकने के बाद लौट आए। शव दफनाए जाने के बाद मांगें पूरी न होने पर परिजनों ने मिट्टी से शव निकालने का अल्टीमेटम दिया था।
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उन्नाव कांड
- फोटो : अमर उजाला
प्रशासनिक अधिकारियों ने समाधि को पक्का कराने की कोशिश की तो विरोध कर परिजनों ने निर्माण की ईंटें उखाड़कर फेंक दीं थी। इस अंदेशे पर कि परिजन कहीं शव को मिट्टी से बाहर न निकाल लें, एसपी ने समाधि स्थल के पास पुलिस का कड़ा पहरा लगाया था। तंबू तानकर पिछले तीन दिन से पुलिस कर्मी समाधि की सुरक्षा कर रहे हैं।
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दुष्कर्म पीड़िता के अंतिम संस्कार के दौरान मौजूद भारी फोर्स और भीड़
- फोटो : अमर उजाला
गुरुवार को भी प्रशासनिक अधिकारियों के निर्देश पर ड्यूटी के दौरान सुरक्षा में तैनात पुलिस बल पीड़िता के दरवाजे से लेकर दो किमी दूर समाधि स्थल तक भ्रमण करता रहा। पीड़िता के दरवाजे पर प्रभारी निरीक्षक मौरावां के साथ छह पुलिस कर्मी तैनात रहे। वहीं समाधि स्थल पर दो दरोगा, दो हेड कांस्टेबल, दो महिला सिपाही समेत 12 पुलिस कर्मी पहरा देते रहे। प्रभारी निरीक्षक बिहार भी पीड़िता के घर से समाधि स्थल तक सुरक्षा का जायजा लेते रहे।