डॉक्टर सुशील कुमार की दिनचर्या, रहन सहन और उसके स्वभाव को और ज्यादा पता लगाने के लिए पुलिस ने अपार्टमेंट के अंदर लगे सीसीटीवी कैमरों के करीब 30 दिनों के फुटेज पेनड्राइव में जुटाए हैं। फुटेज से डॉक्टर के अपनी ही दुनिया में खोए रहने का खुलासा हुआ है।
सिर्फ काम पर ही आने जाने के लिए वह फ्लैट से निकलता था और रास्ते में यदि किसी शख्स से भेंट हो जाए तो बात तक नहीं करता था। फुटेज खंगाले तो पता चला कि 30 दिनों में महज 75 बार ही वह फ्लैट से बाहर आया था।
52 बार काम पर जाने के लिए निकला था। पत्नी और बच्चों के साथ कभी एक साथ नहीं निकला। न ही कभी एक साथ घूमने गया। किसी भी फुटेज में उसे न तो मुस्कुराते देखा गया और न ही किसी अन्य शख्स से कोई बातचीत करते पाया गया।
कुछ फुटेज में उसके पास से गुजर रहे अपार्टमेंट में रहने वाले लोग उसे शिष्टाचार में नमस्कार करते नजर आए, लेकिन डॉक्टर ने किसी का जवाब नहीं दिया था। दो फुटेज में काली पन्नी में कुछ सामान घर ले जाते नजर आया है। पुलिस को पन्नी में बेहोश करने वाली दवा या हत्या में इस्तेमाल की जाने वाली हथौड़ी लाने की आशंका है।
2 of 5
kanpur triple murder
- फोटो : amar ujala
कभी त्योहार पर भी नहीं देता था जवाब
अपार्टमेंट के सिक्योरिटी गार्ड व सुपरवाइजर शिवपाल ने बताया कि अपार्टमेंट में कई परिवार रहते हैं, लेकिन डॉक्टर जैसा सनकी कोई नहीं था। आम दिनों में जब डॉक्टर मिलता था तो वह उसे सलाम करता था, लेकिन कभी कोई जवाब नहीं मिलता था।
3 of 5
मौके पर मौजूद पुलिस
- फोटो : अमर उजाला
गार्ड के अनुसार त्योहार के मौके पर भी टोकने पर डॉक्टर कभी कोई जवाब नहीं देता था। उसके इस स्वभाव को लेकर पूरे अपार्टमेंट में चर्चाएं होती थीं, लेकिन किसी को नहीं पता था कि खुद में खोया रहने वाला इंसान इतना खूंखार साबित हो सकता है।
4 of 5
kanpur triple murder
- फोटो : amar ujala
तीन हत्याओं से दहशत में हैं अपार्टमेंट वाले
गार्ड ने बताया कि हत्या के पहले अपार्टमेंट में देर शाम तक चहल पहल बनी रहती थी। लोग शाम के वक्त बिना किसी डर के बड़े से क्षेत्र में टहलते थे। पार्क में बैठे घंटों बातें किया करते थे, लेकिन एक साथ तीन हत्याओं से पूरे अपार्टमेंट में दहशत का माहौल है।
5 of 5
kanpur triple murder
- फोटो : amar ujala
शाम होते ही लोग अपने घरों में चले जाते हैं। खासकर, बच्चे और महिलाएं रात के वक्त जरूरत पड़ने पर भी बाहर नहीं निकलते हैं। लोगों के डर को दूर करने के लिए सोमवार को परिसर में एक धार्मिक कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया। चंद्रप्रभा, खुशी और शिखर की आत्मा की शांति के लिए कैं डल भी जलाई गई। वहीं, दिन में करीब चार से पांच चक्कर पुलिस कर्मियों के लगते हैं और पुलिस कभी भी किसी से भी पूछताछ शुरू कर देती है। ऐसे में लोग पुलिस के सवालों से भी बचने के लिए घरों से नहीं निकल रहे हैं।