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पुलवामा आतंकी हमलाः शहर रो रहा है....दर्द भी है और गर्व भी है, मां ने कहा- शहादत का बदला चाहिए
Sat, 16 Feb 2019 06:15 AM IST
शिखा पांडेय
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Sat, 16 Feb 2019 06:15 AM IST
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उन्नाव का लाल शहीद
- फोटो : अमर उजाला
एक महीने की छुट्टियां बिताने के बाद उन्नाव जिले के लाल अजीत कुमार आजाद 10 फरवरी को जम्मू के लिए घर से रवाना हुए थे। गुरुवार दोपहर जम्मू से श्रीनगर जाते समय उन्होंने फोन पर पत्नी मीना से बात की थी। दो मिनट की बातचीत में उन्होंने श्रीनगर पहुंचकर दोबारा फोन करने का वादा किया था।
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उन्नाव का लाल शहीद
- फोटो : अमर उजाला
देर शाम तक मीना अजीत के फोन का इंतजार करती रहीं लेकिन फोन नहीं आया। रात करीब दस बजे मीना के फोन की घंटी बजी तो उसने लपक कर फोन उठाया। दूसरी तरफ से अजीत के शहीद होने की सूचना दी गई तो पहले तो उसे विश्वास नहीं हुआ। वह बुत बनी बैठी रहीं फिर फूट-फूटकर रोने लगीं। बेटियों को बांहों में समेटे वह घंटों बिलखती रहीं।
उन्नाव का लाल शहीद
- फोटो : अमर उजाला
घरवालों ने बेटियों का हवाला देकर उन्हें किसी तरह संभाला। मीना ने बताया कि अजीत ने श्रीनगर पहुंचकर बात करने का वादा किया था लेकिन वह अपना वादा पूरा नहीं कर सके। मां की आंखों में आंसू देख उनकी दोनों बेटियां भी बिलख रही हैं।
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उन्नाव का लाल शहीद
- फोटो : अमर उजाला
सीआरपीएफ में जवान अजीत कुमार की दो बेटियां हैं। जिनमें ईशा (8) व श्रेया (6) साल की है। अजीत कुमार ने दोनों बेटियाें को डॉक्टर बनाने का सपना देखा था। पत्नी मीना ने बताया कि 10 फरवरी को जब वह जम्मू जा रहे थे तब उन्होंने बेटियों को मन लगाकर पढ़ने व डॉक्टर बनने का सपना पूरा करने की बात कही थी।
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उन्नाव का लाल शहीद
- फोटो : अमर उजाला
जवान बेटे के आतंकी घटना में शहीद होने की खबर ने मां राजवंती को अंदर तक झकझोर दिया।