आज विश्व एड्स दिवस के मौके पर कानपुर में हजारों डॉक्टरों व मेडिकल छात्र इस जानलेवा बीमारी से बचाव के लिए लोगों को प्रेरित करने के लिए सड़कों पर उतरे। हाथों में बैनर लिए इन्होंने सड़कों पर बुलंद आवाज में नारे लगाए।
मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल नवनीत कुमार ने रैली को दिखाई झंडी
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रैली को मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल नवनीत कुमार ने झंडी दिखाकर रवाना किया
सुबह तकरीबन साढें नौ बजे मार्च का आगाज बुलंद आवाज में नारों के साथ हुआ। समा देखने लायक था। लोगों को जागरूक करने के लिए मेडिकल कॉलेज के एटिआर विभाग के डॉक्टर व मेडिकल छात्र हजारों की संख्या में सड़कों पर उतरे। इस रैली को मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल नवनीत कुमार ने झंडी दिखाकर रवाना किया। रैली कानपुर एटिआर सेंटर से शहर का चक्कर लगाते हुए मेडिकल कॉलेज के ओपिडी तक गई।
3262 पुरुष और 1901 महिलाएं एड्स पीड़ित
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महिलाएं भी हुई रैली में शामिल
नेशनल एड्स कंट्रोल आर्गेनाईजेशन के आंकड़ों की मानें तो जहां साल 2000 में एचआईवी के नए संक्रमित लोगों की संख्या 0.274 मिलियन थी वहीं 2011 में यही संख्या 0.116 मिलियन हो गई थी। पर यह भी ध्यान देने वाली बात है कि साल 2013 में 130,000 लोगों की एड्स की वजह से मौत हो गई थी। मतलब अभी भी इस बीमारी के प्रति जागरूकता फैलाए जाते रहने की सख्त जरूरत है। डॉ आर के वर्मा द्वारा दिए गए आकड़ों पर ध्यान दें तो कानपुर में 5501 एचआईवी पॉजिटिव मामले अस्पताल में दर्ज कराए गए हैं। इनमें 3262 पुरुष और 1901 महिलाएं शामिल है। जबकि 506 बच्चे और 13 ट्रांसजेंडर भी एड्स पीड़ित हैं।
1986 में मिला था पहला केस
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एड्स दिवस पर हाथों में बैनर लिए छात्र
भारत में भले ही एड्स पीड़ितों की संख्या अब मिलियन में गिनी जाती हो पर क्या आपको पता है आज से ठीक 30 साल पहले भारत में इस बीमारी का पहला पीड़ित मिला था। यह एड्स पीड़ित एक सेक्स वर्कर थी। चेन्नई में रहने वाली इस महिला की इस बीमारी का पता लगाया था डॉ. सुनीति सोलोमन ने।इसके बाद ही सेक्स वर्कर्स के बीच इस बीमारी के ढेरों पीड़ित पाए जाने लगे। इस वक़्त पर बहुत से यात्री इंडिया आये हुए थे और कई लोग बाहर विदेश जा भी रहे थे, तो ऐसा मान लिया गया कि जरूर इस बीमारी का पहला संक्रमण किसी विदेशी से ही मिला होगा।