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पाक जेल से आई चिट्ठी में इस कदर छलका भारतीय 'कैदियों का दर्द'
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Sat, 30 Dec 2017 10:45 AM IST
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पाक जेल से आई चिट्ठी
- फोटो : अमर उजाला
लगभग दो माह पूर्व जसईपुर (बांदा) गांव के लगभग एक दर्जन युवक हर साल की तरह गुजरात बंदरगाह ठेके पर मछली का शिकार करने गए थे। समुद्र में शिकार खेलते समय पानी पाकिस्तानी सीमा में दाखिल हो जाने पर उन्हें ओखा बंदरगाह के आगे गिरफ्तार कर लिया था। तब से यह सभी कराची की लांदी जेल में बंद हैं।
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कमाऊ पूतों के पाकिस्तान में कैद हो जाने से उनके परिवार आर्थिक तंगहाली झेल रहे हैं। वृद्ध माता-पिता से लेकर पत्नी और बच्चे सभी में मायूसी है। पकड़े जाने के बाद यहां परिजनों को उनकी कोई खैर-खैरियत नहीं मिल रही थी।
जेल से मछुआरों द्वारा अपने परिजनों को भेजी गई चिट्ठी
- फोटो : अमर उजाला
‘हम लोग खूब अच्छी तरह रह कर दुआ करते हैं कि आप भी अच्छे से होंगे। दीपू को फोन कर बोल देना कि 10-20 हजार रुपये आकर देगा। जब मैं आऊंगा तो उसका पैसा दूंगा’। पाकिस्तान की जेल में बंद यहां के मछुआरों की इस पहली चिट्ठी ने परिजनों की चिंता काफी हद तक कम कर दी है। अलबत्ता उन्हें अपने इन कमाऊ पूतों के घर लौटने का बेसब्री से इंतजार है।
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जेल से मछुआरों द्वारा अपने परिजनों को भेजी गई चिट्ठी
- फोटो : अमर उजाला
गुरुवार को गांव का डाकिया इन युवकों के घरों को खुशी का पैगाम दे गया। पाकिस्तानी जेल से भेजी चिट्ठी में ओमप्रकाश कोरी ने घर वालों को बताया है कि वह सभी लोग खूब अच्छी तरह से हैं। उनकी चिंता न करें। ओमप्रकाश ने घर वालों को लिखा है कि उसके दोस्त दीपू को फोन करके बोल देना कि 10-20 हजार रुपये घर में दे जाए। जब वह आएगा तो उसका पैसा दे देगा।
ओमप्रकाश ने अपने आधार कार्ड और राशन कार्ड की फोटोकापी भेजने की बात कही है। यह भी कहा है कि ऊपर वाला इम्तहान ले रहा है। माता-पिता को चरण स्पर्श और छोटे भाई-बहनों को प्यार लिखा है। उधर, यह चिट्ठी आने के बाद पकड़े गए युवकों के घर वालों ने राहत की सांस ली है।