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कानपुर अग्निकांड: हे भगवान ये क्या हो गया, 5 दिन पहले फैक्टरी आए नारेंद्र की पत्नी बिलखते हुए बोली- अब कैसे...
Sat, 17 Dec 2022 10:06 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, कानपुर
अमर उजाला नेटवर्क, कानपुर
Published by: शाहरुख खान
Updated Sat, 17 Dec 2022 10:06 AM IST
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कानपुर की फैक्टरी में लगी आग
- फोटो : अमर उजाला
कानपुर के फजलगंज के गड़रियनपुरवा स्थित साइकिल की गद्दी बनाने वाली एसके इंडस्ट्रीज में शुक्रवार तड़के साढ़े तीन बजे शॉर्ट सर्किट से आग लग गई। दम घुटने से तीन मजदूरों की मौत हो गई, जबकि तीन लोग बेहोश हो गए। सूचना पर मौके पर पहुंची दमकल की आठ गाड़ियों ने दो घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। वहीं फैक्टरी के प्रथम तल पर फंसे पांच कर्मचारियों ने पड़ोस की छत के रास्ते भाग कर अपनी जान बचाई। बेसुध हुए दो कर्मचारियों को हैलट के आईसीयू में भर्ती कराया गया है, एक डिस्चार्ज हो गया। साइकिल की गद्दी बनाने वाली फैक्ट्री में लगी आग में जान गंवाने वाले तीन मजदूरों के परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। हादसे में किसी की मांग सूनी हुई तो किसी के सिर से पिता के साया उठ गया। पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे तीनों के परिवारों की चीत्कारों से पोस्टमार्टम हाउस गूंज उठा। हर तरफ चीखपुकार मची हुई थी। वहां मौजूद पुलिस कर्मी लोगों का ढांढस बांधते दिखाई दिए।
कानपुर की फैक्टरी में लगी आग
- फोटो : अमर उजाला
अग्निकांड में मरने वाले प्रदीप उर्फ राजू गौतम तीन भाइयों पिंटू व अवधेश में सबसे छोटा था। दो बहनों पूनम और पिंकी की शादी हो चुकी है, जबकि छोटी बहन विनीता है। वह बड़े भाई पिंटू के साथ पिछले आठ साल से फैक्टरी में काम करता था। हादसे के दौरान बड़ा भाई पिंटू भी फैक्टरी के प्रथम तल पर मौजूद था। पिंटू ने बताया कि आग की लपटें उठती देख वह शोर मचाते हुए नीचे की ओर गया था।
kanpur fire
- फोटो : अमर उजाला
पांच दिन पहले दोबारा फैक्टरी में आए थे नारेंद्र
हे भगवान ये क्या हो गया। मेरे बच्चों का क्या होगा। मुझे नहीं पता था कि मेरे पति दोबारा नहीं लौटेंगे। वरना में उन्हें नहीं जाने देती। ये बात कहते हुए मृतक जय प्रकाश पत्नी सीता बेसुध हो जा रही थी। परिवार के लोगों ने उसे किसी तरह संभाला। मूलरूप से उन्नाव के बारासगवर निवासी जयप्रकाश पत्नी सीता व तीन बच्चों यश, वंश और खुशी संग बर्रा छह में किराये के मकान में रहते थे। पत्नी सीता ने बताया कि वह रोज की तरह गुरुवार रात नाइट ड्यूटी पर गए थे। शुक्रवार सुबह करीब आठ बजे फजलगंज पुलिस ने अग्निकांड में पति की मौत की जानकारी दी।
हे भगवान ये क्या हो गया। मेरे बच्चों का क्या होगा। मुझे नहीं पता था कि मेरे पति दोबारा नहीं लौटेंगे। वरना में उन्हें नहीं जाने देती। ये बात कहते हुए मृतक जय प्रकाश पत्नी सीता बेसुध हो जा रही थी। परिवार के लोगों ने उसे किसी तरह संभाला। मूलरूप से उन्नाव के बारासगवर निवासी जयप्रकाश पत्नी सीता व तीन बच्चों यश, वंश और खुशी संग बर्रा छह में किराये के मकान में रहते थे। पत्नी सीता ने बताया कि वह रोज की तरह गुरुवार रात नाइट ड्यूटी पर गए थे। शुक्रवार सुबह करीब आठ बजे फजलगंज पुलिस ने अग्निकांड में पति की मौत की जानकारी दी।
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अग्निकांड में मारे गए तीनों की फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
पोस्टमार्टम हाउस पहुंची पत्नी पति का शव देखते ही गश खाकर गिर गई। वहां मौजूद महिला कांस्टेबल ने शव के पास बिलख रहे बच्चों का ढांढस बांधा। पत्नी रोते हुए बोल रही थी कि पति के निधन के बाद अब परिवार का खर्च और बच्चों की पढ़ाई कैसे होगी।
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कानपुर अग्निकांड
- फोटो : अमर उजाला
गांव से न लौटते, तो बच जाती जान
अग्निकांड में जान गंवाने वाले सचेंडी के कैथा निवासी नारेंद्र सोनी उर्फ दिन्नू चार भाइयों सुरेंद्र, उमेश व सुशील में दूसरे नंबर के थे। भाई सुरेंद्र ने बताया कि सात साल पहले उसकी शादी हुई थी, लेकिन कोई बच्चा नहीं था। वह किसानी के साथ फैक्टरी में भी काम करता था। सोमवार को ही वह गांव से लौटा था। इसके बाद काम पर आना शुरू किया था। पत्नी ज्योति ने कहा कि वह गांव में कुछ दिन और रुकना चाहते थे, लेकिन होनी को कुछ और ही मंजूर था। खुद को दोषी मानकर वह बार-बार बदहवास हो जा रही थी। नारेंद्र की मौत से पत्नी और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था।
अग्निकांड में जान गंवाने वाले सचेंडी के कैथा निवासी नारेंद्र सोनी उर्फ दिन्नू चार भाइयों सुरेंद्र, उमेश व सुशील में दूसरे नंबर के थे। भाई सुरेंद्र ने बताया कि सात साल पहले उसकी शादी हुई थी, लेकिन कोई बच्चा नहीं था। वह किसानी के साथ फैक्टरी में भी काम करता था। सोमवार को ही वह गांव से लौटा था। इसके बाद काम पर आना शुरू किया था। पत्नी ज्योति ने कहा कि वह गांव में कुछ दिन और रुकना चाहते थे, लेकिन होनी को कुछ और ही मंजूर था। खुद को दोषी मानकर वह बार-बार बदहवास हो जा रही थी। नारेंद्र की मौत से पत्नी और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था।