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देश की तीनों सेनाओं की सूचना तकनीक होगी हाईटेक, 13 सदस्यीय कमेटी गठित
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Updated Sun, 11 Nov 2018 03:41 PM IST
सार
- नीति तैयार करने के लिए आईआईटी कानपुर निदेशक की अध्यक्षता में कमेटी गठित
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आईआईटी कानपुर
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विस्तार
देश की तीनों सेनाओं की सूचना तकनीक अब और हाईटेक होगी। इस हाईटेक तकनीक को देश में ही तैयार किया जाएगा। शनिवार को रक्षा मंत्रालय के उत्पाद विभाग ने इसके लिए आईआईटी कानपुर के निदेशक प्रो. अभय करंदीकर की अध्यक्षता में 13 सदस्यीय कमेटी गठित की। अत्याधुनिक तकनीक को देश में ही विकसित किया जाएगा।
यह कमेटी सेना के तीनों विंग के लिए सॉफ्टवेयर डिफाइंड रेडियोस की नीति तैयार करेगी। इस नीति के अंतर्गत सूचना तकनीक का प्रयोग सेना करेगी। विशेषज्ञों के अनुसार अभी प्रयोग में लाई जा रही तकनीक पुरानी हो चुकी है। ऐसे में सुरक्षा की दृष्टि से भी काफी जरूरी है कि नई तकनीक का प्रयोग हो। कमेटी यह निर्धारित करेगी कि कैसी सूचना तकनीक सेना के तीनों विंग के लिए जरूरी है। यह कैसे तैयार हो सकती है? किन-किन देशों की मदद इसमें ली जा सकती है? तकनीक की टेस्टिंग और सर्टिफिकेशन प्रक्रिया आदि को भी नीति में शामिल किया जाएगा।
कमेटी में थलसेना के मेजर जनरल स्तर के अधिकारी, एयरफोर्स के वाइस एयरमार्शल रैंक के अधिकारी और नेवी के रियर एडमिरल रैंक के अधिकारियों समेत आईआईटी दिल्ली के निदेशक प्रो. रंजन बोस, आईआईटी चेन्नई के प्रो. देविड कोईपिल्लई, आईआईटी कानपुर के डॉ. आदर्श बनर्जी, डीआरडीओ, आईडीएस, भेल, एसआईडीएम, डीडीपी के भी सदस्य होंगे। कमेटी के चेयरमैन प्रो. करंदीकर ने बताया कि सूचना तकनीक को मजबूत बनाने के लिए चार सप्ताह में नीति तैयार करनी है। इसमें कई अहम बिंदुओं को शामिल किया गया है। कोशिश होगी कि ऐसी सभी तकनीकों का विकास देश में ही हो, जो सेना के लिए जरूरी है। इसलिए नीति में भी ऐसा ही प्रावधान किया जाएगा।
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यह कमेटी सेना के तीनों विंग के लिए सॉफ्टवेयर डिफाइंड रेडियोस की नीति तैयार करेगी। इस नीति के अंतर्गत सूचना तकनीक का प्रयोग सेना करेगी। विशेषज्ञों के अनुसार अभी प्रयोग में लाई जा रही तकनीक पुरानी हो चुकी है। ऐसे में सुरक्षा की दृष्टि से भी काफी जरूरी है कि नई तकनीक का प्रयोग हो। कमेटी यह निर्धारित करेगी कि कैसी सूचना तकनीक सेना के तीनों विंग के लिए जरूरी है। यह कैसे तैयार हो सकती है? किन-किन देशों की मदद इसमें ली जा सकती है? तकनीक की टेस्टिंग और सर्टिफिकेशन प्रक्रिया आदि को भी नीति में शामिल किया जाएगा।
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कमेटी में थलसेना के मेजर जनरल स्तर के अधिकारी, एयरफोर्स के वाइस एयरमार्शल रैंक के अधिकारी और नेवी के रियर एडमिरल रैंक के अधिकारियों समेत आईआईटी दिल्ली के निदेशक प्रो. रंजन बोस, आईआईटी चेन्नई के प्रो. देविड कोईपिल्लई, आईआईटी कानपुर के डॉ. आदर्श बनर्जी, डीआरडीओ, आईडीएस, भेल, एसआईडीएम, डीडीपी के भी सदस्य होंगे। कमेटी के चेयरमैन प्रो. करंदीकर ने बताया कि सूचना तकनीक को मजबूत बनाने के लिए चार सप्ताह में नीति तैयार करनी है। इसमें कई अहम बिंदुओं को शामिल किया गया है। कोशिश होगी कि ऐसी सभी तकनीकों का विकास देश में ही हो, जो सेना के लिए जरूरी है। इसलिए नीति में भी ऐसा ही प्रावधान किया जाएगा।
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आईआईटी कानपुर
आईआईटी में मंथन करने आए थे रक्षा उत्पाद के सचिव
तीन नवंबर को ही रक्षा उत्पाद के सचिव डॉ. अजय कुमार आईआईटी आए थे। यहां उन्होंने इंस्टीट्यूट के निदेशक प्रो. अभय करंदीकर से कई मसलों पर बातचीत की। तय हुआ है कि आईआईटी के वैज्ञानिक सेना के लिए कई अत्याधुनिक तकनीक विकसित करेंगे।
इन मुद्दों पर भी काम करेगी कमेटी
- मौजूदा सूचना तकनीक के अलग-अलग केस का अध्ययन करना और जरूरतों की पहचान करना।
- ग्लोबल स्तर पर सूचना तकनीक के मानक तैयार करना और उसे लागू करने की प्रक्रिया का निर्धारण करना।
- देश में तैयार होने वाले सूचना तकनीक की टेस्टिंग और सर्टिफिकेशन की प्रक्रिया का निर्धारण करना।
- हार्डवेयर डिजाइन, एल्गोरिदम डिजाइन, सॉफ्टवेयर कंपोनेंट डिजाइन तैयार करने के लिए नीति का निर्धारण करना।
- इन सभी प्रोजेक्ट पर शिक्षण संस्थानों, इंडस्ट्री को साथ लेकर काम करना।
- प्रोजेक्ट की शुरुआत के लिए जरूरी आर्थिक मदद कहां से मिल सकती है, इसके लिए भी सुझाव देना।
तीन नवंबर को ही रक्षा उत्पाद के सचिव डॉ. अजय कुमार आईआईटी आए थे। यहां उन्होंने इंस्टीट्यूट के निदेशक प्रो. अभय करंदीकर से कई मसलों पर बातचीत की। तय हुआ है कि आईआईटी के वैज्ञानिक सेना के लिए कई अत्याधुनिक तकनीक विकसित करेंगे।
इन मुद्दों पर भी काम करेगी कमेटी
- मौजूदा सूचना तकनीक के अलग-अलग केस का अध्ययन करना और जरूरतों की पहचान करना।
- ग्लोबल स्तर पर सूचना तकनीक के मानक तैयार करना और उसे लागू करने की प्रक्रिया का निर्धारण करना।
- देश में तैयार होने वाले सूचना तकनीक की टेस्टिंग और सर्टिफिकेशन की प्रक्रिया का निर्धारण करना।
- हार्डवेयर डिजाइन, एल्गोरिदम डिजाइन, सॉफ्टवेयर कंपोनेंट डिजाइन तैयार करने के लिए नीति का निर्धारण करना।
- इन सभी प्रोजेक्ट पर शिक्षण संस्थानों, इंडस्ट्री को साथ लेकर काम करना।
- प्रोजेक्ट की शुरुआत के लिए जरूरी आर्थिक मदद कहां से मिल सकती है, इसके लिए भी सुझाव देना।