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धूल और धुएं से होते मस्से, टेढ़ी हो जाती नाक, ये लक्षण दिखें तो हो जाएं सतर्क
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Updated Mon, 26 Nov 2018 02:29 PM IST
सार
- सर्जरी से बीमारी के साथ ठीक हो जाता नाक का आकार
- एलर्जिक मार्च से नाक की एलर्जी पहुंच जाती छाती तक
- डॉ. मिलिंद कीर्तने को लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड
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विस्तार
कानपुर में यूपी ईएनटी एसोसिएशन के बैनर तले आयोजित तीन दिवसीय यूपीकॉन-2018 के अंतिम दिन तकनीकी सत्रों में बताया गया कि प्रदूषण बढ़ने के कारण धूल और धुआं जाने से नाक के अंदर एलर्जी और संक्रमण हो जाता है। इससे मस्से हो जाते हैं जिससे नाक टेढ़ी हो जाती है।
सत्र में मुंबई से आए ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. अशीम देसाई ने बताया कि सर्जरी से मस्सों को ठीक करने के साथ नाक की शक्ल भी ठीक जा सकती है। नाक की एलर्जी छाती तक पहुंचती है। इसे ‘एलर्जिक मार्च’ कहते हैं। कार्यक्रम में मुंबई के वरिष्ठ ईएनटी सर्जन डॉ. मिलिंद कीर्तने को लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड दिया गया।
सत्र में डॉ. अशीम देसाई ने बताया कि अगर किसी की नाक टेढ़ी है तो उसे चेहरे के आकार के लिहाज से दुरुस्त किया जा सकता है। इससे व्यक्ति का आत्मविश्वास बढ़ता है। उन्होंने बताया कि मुंह से सांस लेने पर शरीर को पर्याप्त आक्सीजन नहीं मिल पाती। इससे थकान आती है। खर्राटे आ सकते हैं जिससे अचानक आक्सीजन लेवल घटने से हार्ट अटैक आ सकता है।
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सत्र में मुंबई से आए ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. अशीम देसाई ने बताया कि सर्जरी से मस्सों को ठीक करने के साथ नाक की शक्ल भी ठीक जा सकती है। नाक की एलर्जी छाती तक पहुंचती है। इसे ‘एलर्जिक मार्च’ कहते हैं। कार्यक्रम में मुंबई के वरिष्ठ ईएनटी सर्जन डॉ. मिलिंद कीर्तने को लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड दिया गया।
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सत्र में डॉ. अशीम देसाई ने बताया कि अगर किसी की नाक टेढ़ी है तो उसे चेहरे के आकार के लिहाज से दुरुस्त किया जा सकता है। इससे व्यक्ति का आत्मविश्वास बढ़ता है। उन्होंने बताया कि मुंह से सांस लेने पर शरीर को पर्याप्त आक्सीजन नहीं मिल पाती। इससे थकान आती है। खर्राटे आ सकते हैं जिससे अचानक आक्सीजन लेवल घटने से हार्ट अटैक आ सकता है।
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इसके अलावा डॉ. मिलिंद कीर्तने और दूसरे विशेषज्ञों की लाइव सर्जरी दिखाई गई। बाद में एसोसिएशन की जनरल बॉडी मीटिंग हुई। इसमें अगले वर्ष के लिए डॉ. रोहित मेहरोत्रा को अध्यक्ष (इलेक्ट) और डॉ. बृजेंद्र शुक्ल को उपाध्यक्ष (इलेक्ट) घोषित किया गया। समापन पर बाहर से आए विशेषज्ञों को प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।
कम पानी पीने से भी हो जाती लार ग्रंथि की पथरी
सुर्ती, तंबाकू के अलावा कम पानी पीने और सौंफ खाने से भी लार की ग्रंथि में पथरी हो जाती है। सौंफ के कण ग्रंथि के मुंह पर जमने लगते हैं और पथरी में तब्दील हो जाते हैं। यह बात केईएम अस्पताल मुंबई की डॉ. हेतल मारफतिया और डॉ. मिलिंद नवलखे ने बताई। उन्होंने कहा कि लार ग्रंथि थूक बनाती है।
इसमें इंजाइम होते हैं जो पाचन क्रिया में सहायक होते हैं। उन्होंने कहा कि दिन में व्यक्ति के काम से कम दो लीटर लार बननी चाहिए। भारतीय चटपटा भोजन लार बनाने में सहायक होता है। लार ग्रंथि की पथरी को बिना बाहर से चीरा लगाए इंडोस्कोपी से ठीक किया जा सकता है। लार कम होने से बच्चों के गाल फूलने की बीमारी पैरोटाइटिस का जल्दी इलाज शुरू करना चाहिए।
कम पानी पीने से भी हो जाती लार ग्रंथि की पथरी
सुर्ती, तंबाकू के अलावा कम पानी पीने और सौंफ खाने से भी लार की ग्रंथि में पथरी हो जाती है। सौंफ के कण ग्रंथि के मुंह पर जमने लगते हैं और पथरी में तब्दील हो जाते हैं। यह बात केईएम अस्पताल मुंबई की डॉ. हेतल मारफतिया और डॉ. मिलिंद नवलखे ने बताई। उन्होंने कहा कि लार ग्रंथि थूक बनाती है।
इसमें इंजाइम होते हैं जो पाचन क्रिया में सहायक होते हैं। उन्होंने कहा कि दिन में व्यक्ति के काम से कम दो लीटर लार बननी चाहिए। भारतीय चटपटा भोजन लार बनाने में सहायक होता है। लार ग्रंथि की पथरी को बिना बाहर से चीरा लगाए इंडोस्कोपी से ठीक किया जा सकता है। लार कम होने से बच्चों के गाल फूलने की बीमारी पैरोटाइटिस का जल्दी इलाज शुरू करना चाहिए।