फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

"विद्यालय में घास या घास में विद्यालय'! यहां का नजारा देख कोई भी दुविधा में पड़ सकता है

Fri, 06 Jul 2018 08:55 AM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Updated Fri, 06 Jul 2018 08:55 AM IST
विज्ञापन
grass in prisdiy school campus
विद्यालय परिसर में खड़ी बड़ी बड़ी घास  - फोटो : अमर उजाला
यूपी के कानपुर देहात जिले में परिषदीय स्कूलों में व्यवस्थाएं सुधरने का नाम नहीं ले रही हैं। ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद स्कूल खुले चार दिन बीत गए हैं। अभी तक स्कूलों में पठन-पाठन का माहौल नहीं बन सका है। सरवनखेड़ा ब्लाक के चितरिया प्राथमिक स्कूल में कमर तक घास खड़ी है। झाड़ियां होने से जहरीले कीड़ों का डेरा बना है। अव्यवस्था के कारण दोपहर में समय से पहले ही स्कूल में ताला लटक रहा था। 


 
grass in prisdiy school campus
विद्यालय परिसर में घास  - फोटो : अमर उजाला
बेसिक शिक्षा विभाग परिषदीय विद्यालयों में बच्चों का दाखिला बढ़ाने के लिए निशुल्क किताबें, बैग, दोपहर का भोजन, जूता मोजा व ड्रेस आदि दे रहा है। करोड़ों रुपये शिक्षा के नाम पर खर्च किए जा रहे हैं। जिम्मेदारों की अनदेखी से बच्चों को लाभ नहीं मिल पा रहा है। शैक्षिक स्तर में सुधार न होने से अभिभावकों का रुझान निजी स्कूलों की तरफ है। परिषदीय स्कूलों की हालत यह है कि समय से शिक्षक नहीं पहुंच रहे हैं, कहीं शिक्षक पहुंच रहे तो बच्चे नहीं है। 

 
grass in prisdiy school campus
विद्यालय परिसर में घास  - फोटो : अमर उजाला
गुरुवार को सरवनखेड़ा ब्लाक के प्राथमिक स्कूल चितरिया में दोपहर 12:30 बजे ही ताला लटक रहा था। जबकि, स्कूल बंद करने का समय एक बजे है। परिसर में हैंडपंप व शौचालय बड़ी घास से घिरे हैं। यही हाल रसोईघर का है। बरामदे व कक्ष भी घास से घिरे हैं। ऐसी घास कि उसमें बच्चे न दिखाई पड़े। परिसर की सफाई कराने की जरूरत शिक्षकों को भी समझ में नहीं आई। स्कूल की दशा देखकर ऐसा लग रहा है जैसे कई सालों से विद्यालय बंद पड़ा है। 


 
विज्ञापन
विज्ञापन
grass in prisdiy school campus
विद्यालय परिसर में घास  - फोटो : अमर उजाला
प्राथमिक विद्यालय जलालपुर में बच्चों को मेनू के आधार पर भोजन नहीं दिया जा रहा है। यहां पंजीकृत 144 में 75 बच्चे मौजूद थे इसी परिसर में स्थित जूनियर स्कूल में पंजीकृत 139 में केवल 23 बच्चे थे। दोनों विद्यालयों में बच्चों को तहरी खिलाई गई थी। जबकि, मेनू के आधार पर सब्जी रोटी बनाई जानी थी। बच्चों ने बताया कि ज्यादातर तहरी खिलाई जाती है। दोनों विद्यालयों के बच्चों का शैक्षिक स्तर पर बहुत कमजोर है। 


बोले जिम्मेदार 
स्कूलो में छात्र संख्या बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं, चितरिया स्कूल में घास खड़ी होने की जानकारी नहीं है। बीईओ सरवनखेड़ा को वहां का निरीक्षण कर कार्रवाई करने के निर्देश दिए जाएंगे। संगीता सिंह, बीएसए
अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed