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बिकरू कांड: विकास के एनकाउंटर को पत्नी ने फर्जी तो बताया पर आयोग के सामने नहीं आई, पुलिस को क्लीन चिट

Sat, 21 Aug 2021 02:23 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा सूरज शुक्ला, अमर उजाला, कानपुर
सूरज शुक्ला, अमर उजाला, कानपुर Published by: प्रभापुंज मिश्रा Updated Sat, 21 Aug 2021 02:23 AM IST
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Bikru case: Wife told Vikas's encounter to be fake but did not appear before the commission, police got clean chit
विकास दुबे कांड - फोटो : amar ujala
बिकरू कांड को अंजाम देने वाले कुख्यात बदमाश विकास दुबे के एनकाउंटर के खिलाफ न किसी ने गवाही दी और न ही साक्ष्य पेश किए। यहां तक कि शपथपत्र देकर एनकाउंटर को फर्जी बताने वाली उसकी पत्नी रिचा दुबे भी जांच में शामिल नहीं हुई। उसने न्यायिक आयोग के समक्ष बयान भी नहीं दर्ज कराए। आयोग के मुताबिक, विकास के एनकाउंटर को जांच के दौरान किसी ने चुनौती ही नहीं दी। ऐसे में बिना किसी दुविधा के पुलिस को क्लीन चिट दे दी गई। विकास दुबे और उसके गैंग ने दो जुलाई 2020 को चौबेपुर थानाक्षेत्र के बिकरू गांव में आठ पुलिसकर्मियों को मार दिया था। इस जघन्य वारदात के हफ्तेभर बाद विकास को उज्जैन में गिरफ्तार किया गया था। वहां से कानपुर लाते समय 10 जुलाई की सुबह विकास दुबे सचेंडी थाने के पास मुठभेड़ में मारा गया था। एनकाउंटर पर तमाम लोगों ने सोशल मीडिया पर सवाल उठाए थे। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने एनकाउंटर की जांच के लिए न्यायिक आयोग का गठन किया था। आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक, जांच के दौरान एक भी शख्स सामने नहीं आया, जिसने विकास दुबे या उसके गैंग के पांच अन्य बदमाशों के एनकाउंटर पर सवाल उठाए हों। किसी ने कोई साक्ष्य भी नहीं उपलब्ध कराया।


 
Bikru case: Wife told Vikas's encounter to be fake but did not appear before the commission, police got clean chit
विकास दुबे की अस्थियां लेकर जाता बेटा साथ में रिचा दुबे - फोटो : amar ujala
रिचा ने फर्जी एनकाउंटर का किया था दावा
आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक, विकास दुबे की पत्नी रिचा दुबे ने एक शपथपत्र दिया था। इसमें उसने विकास के एनकाउंटर पर सवाल खड़े करते हुए फर्जी करार दिया था। आयोग का दावा है कि शपथपत्र देने के बाद रिचा जांच में शामिल नहीं हुई। इसलिए उस शपथपत्र के कोई मायने नहीं रह गए। रिचा जांच में शामिल होती और बयान दर्ज कराती तो आयोग उसके आरोपों की जांच करता। तथ्य सत्यापित और पुख्ता साक्ष्य होने की स्थिति में आयोग उसकी जांच कर रिपोर्ट पेश करता।



 
Bikru case: Wife told Vikas's encounter to be fake but did not appear before the commission, police got clean chit
विकास दुबे कांड - फोटो : amar ujala
किसी पर नहीं आई जांच की आंच
आयोग ने एनकाउंटर को चुनौती न दिए जाने का तथ्य अपनी रिपोर्ट में शामिल किया है। इससे साफ है कि एनकाउंटर के खिलाफ गवाह और साक्ष्य न होने से जांच एकतरफा हो गई। इसलिए किसी पर भी जांच की आंच नहीं आई। इस संबंध में आयोग के सामने कोई पेश होता, साक्ष्य देता और गवाह बनता तो शायद जांच रिपोर्ट चौंकाने वाली होती।

 
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Bikru case: Wife told Vikas's encounter to be fake but did not appear before the commission, police got clean chit
विकास दुबे कांड - फोटो : amar ujala
सोशल मीडिया तक सीमित रह गए सवाल 
विकास के एनकाउंटर पर हर तरफ सवाल खड़े हो रहे थे। मसलन, विकास का सफारी गाड़ी से अचानक टीयूवी कार में पहुंच जाना, मीडियाकर्मियों को बारा टोल पर रोक देना, इसके तुरंत बाद टीयूवी का पलट जाना और विकास दुबे का एनकाउंटर हो जाना। हालांकि, पुलिस का दावा था कि कार पलटते ही विकास इंस्पेक्टर की पिस्टल लेकर भागा था। पीछा करने पर उसने गोली चलाई थी। जवाबी कार्रवाई में वह मारा गया था। पुलिस की इस कहानी में कई झोल थे। जैसे विकास का एक पैर खराब होने के बाद भी वह भागा, यह किसी को हजम नहीं हुआ। इसी तरह गाड़ी पलटने से पांच-छह पुलिसकर्मियों का घायल होना और उसके भागने लायक बचना, यह भी किसी के गले नहीं उतर रहा था। एनकाउंटर के बाद यही सब सवाल उठाए गए थे। मगर आयोग की जांच में इस संबंध में न किसी ने पक्ष रखा और न ही सुबूत दिए।

 
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विकास दुबे कांड - फोटो : amar ujala
...तब जांच में उलझी थी रिचा
न्यायिक आयोग ने जब एनकाउंटरों की जांच शुरू की थी, उस समय रिचा दुबे कई जांचों में उलझी रही। बिकरू गांव में विकास का मकान ध्वस्त किए जाने के बाद रिचा की लखनऊ की संपत्तियां भी जांच के दायरे में थीं। एलडीए ने रिचा को नोटिस भेजा था। यहां तक कि उसका मकान गिराने का भी आदेश जारी हो गया था। सूत्रों के मुताबिक, जांच के दौरान रिचा पर काफी दबाव था। माना जा रहा है कि इसी वजह से वह एनकाउंटर के खिलाफ पैरवी भी नहीं कर सकी।
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