जानिए शिवभक्त बाणासुर और उसके अद्भुत आश्रम के बारे में, प्राकृतिक गुफाओं से बहती है अविरल जलधारा
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चित्रकूट मऊ तहसील से 14 किमी दूर बरहा कोटरा गांव पड़ता है। कहा जाता है कि यह गांव बाणासुर जिसका रामचरित मानस में संत तुलसीदास ने धनुष यज्ञ लीला में जिक्र किया है। उसकी मां बरहा के नमा से पड़ा है।
यहां पर दो प्राकृतिक गुफाएं है एक गुफा में पांच अद्वितीय शिवलिंग को स्पर्श करती अविरल जलधारा बहती है। जबकि दूसरी गुफा को बंद कर दिया गया है। बताया जाता है ऋषियन में पाताल नरेश शिव भक्त बाणासुर के अलावा तमाम ऋषियां ने तपस्या की थी।
भगवान श्रीराम वनवास जाते समय यहां रूक कर ऋषियों को आशीर्वाद दिया था। ऋषियन में आज भी पुराने गौरव को दोहराते हुए सात मंदिर अवशेष है। यहां पर शिवमंदिर, गणेश, मंदिर, दुर्गा, मंदिर, सूर्य मंदि आदि हैं। सूर्य मंदिर में सात घोड़ों का रथ भी बना है।