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वाजपेयी की 'अटल लोकप्रियता', किस्सा उस दिन का जब जूठा गिलास पाने की मच गई थी होड़

Sat, 18 Aug 2018 07:54 AM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Updated Sat, 18 Aug 2018 07:54 AM IST
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Atal bihari vajpai memories related to kanpur
कानपुर में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का कानपुरियों के बीच जबर्दस्त क्रेज था। वह अपने कार्यकर्ताओं से निराले अंदाज में पेश आते थे। बृहस्पतिवार को जब उनके निधन की खबर आई तो उनके साथ बिताए पलों को लोगों ने सोशल मीडिया और फोन के जरिए एक दूसरे से साझा किया। इसी पलों में एक यादगार पल वर्ष 2004 में फूलबाग में भाजपा की चुनावी रैली से जुड़ा है।


 
Atal bihari vajpai memories related to kanpur
कानपुर में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी
फूलबाग की उस रैली में अपार भीड़ भाजपा को वोट देने के इरादे से नहीं बल्कि अटल बिहारी वाजपेयी को सुनने के लिए जमा हुई थी। अटल बिहारी वाजपेयी को लेकर पार्टी के कार्यकर्ताओं और स्थानीय जनता में ऐसा नशा था कि हर कोई उनके पास जाना चाह रहा था। पूर्व विधायक राकेश सोनकर रैली की जनसभा के संचालक और तत्कालीन भाजपा जिला इकाई के महामंत्री रहे सुरेंद्र मैथानी सह संचालक थे। जितनी देर तक वाजपेयी का भाषण चला लोगों ने अवाक होकर सुना।
Atal bihari vajpai memories related to kanpur
कानपुर में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी
एक घंटे से अधिक समय तक अपने भाषण के दौरान उन्होंने कांच की गिलास में भरा हुआ पानी आधा पिया और आधा भरा हुआ गिलास डायस पर रख दिया। उसी के पास में अटल ने अपने गले से उतारी गई फू लों की माला भी रख दी थी। जैसे ही अटल बिहारी का भाषण खत्म हुआ और वह मंच से उतरकर सुरक्षा घेरे में चले गए। वहां मौजूद भीड़ अचानक मंच की तरफ भागने लगी। मंच पर रखे वाजपेयी की गले से उतारी गई माला पाने के लिए खींचतान शुरू हो गई।
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Atal bihari vajpai memories related to kanpur
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से मिलते पूर्व सांसद श्याम प्रसाद मिश्रा
इसके बाद डायस पर रखा वह गिलास जिसमें अटल ने पानी पीने के बाद आधा छोड़ दिया था। उस गिलास का पानी पीने के लिए कई कार्यकर्ता एक साथ लपके लेकिन वह पार्टी कार्यकर्ता मंजीत सिंह के हाथ लगा। मंजीत सिंह शास्त्री नगर में रहते हैं, इस समय वह भाजपा की जिला इकाई में पदाधिकारी हैं। मंजीत बताते हैँ कि जब उन्हें लगा कि गिलास उनके हाथ से गिर जाएगा तो उसे उन्होंने छिपा लिया।
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