पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का कानपुरियों के बीच जबर्दस्त क्रेज था। वह अपने कार्यकर्ताओं से निराले अंदाज में पेश आते थे। बृहस्पतिवार को जब उनके निधन की खबर आई तो उनके साथ बिताए पलों को लोगों ने सोशल मीडिया और फोन के जरिए एक दूसरे से साझा किया। इसी पलों में एक यादगार पल वर्ष 2004 में फूलबाग में भाजपा की चुनावी रैली से जुड़ा है।
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कानपुर में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी
फूलबाग की उस रैली में अपार भीड़ भाजपा को वोट देने के इरादे से नहीं बल्कि अटल बिहारी वाजपेयी को सुनने के लिए जमा हुई थी। अटल बिहारी वाजपेयी को लेकर पार्टी के कार्यकर्ताओं और स्थानीय जनता में ऐसा नशा था कि हर कोई उनके पास जाना चाह रहा था। पूर्व विधायक राकेश सोनकर रैली की जनसभा के संचालक और तत्कालीन भाजपा जिला इकाई के महामंत्री रहे सुरेंद्र मैथानी सह संचालक थे। जितनी देर तक वाजपेयी का भाषण चला लोगों ने अवाक होकर सुना।
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कानपुर में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी
एक घंटे से अधिक समय तक अपने भाषण के दौरान उन्होंने कांच की गिलास में भरा हुआ पानी आधा पिया और आधा भरा हुआ गिलास डायस पर रख दिया। उसी के पास में अटल ने अपने गले से उतारी गई फू लों की माला भी रख दी थी। जैसे ही अटल बिहारी का भाषण खत्म हुआ और वह मंच से उतरकर सुरक्षा घेरे में चले गए। वहां मौजूद भीड़ अचानक मंच की तरफ भागने लगी। मंच पर रखे वाजपेयी की गले से उतारी गई माला पाने के लिए खींचतान शुरू हो गई।
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पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से मिलते पूर्व सांसद श्याम प्रसाद मिश्रा
इसके बाद डायस पर रखा वह गिलास जिसमें अटल ने पानी पीने के बाद आधा छोड़ दिया था। उस गिलास का पानी पीने के लिए कई कार्यकर्ता एक साथ लपके लेकिन वह पार्टी कार्यकर्ता मंजीत सिंह के हाथ लगा। मंजीत सिंह शास्त्री नगर में रहते हैं, इस समय वह भाजपा की जिला इकाई में पदाधिकारी हैं। मंजीत बताते हैँ कि जब उन्हें लगा कि गिलास उनके हाथ से गिर जाएगा तो उसे उन्होंने छिपा लिया।