सारनाथ के पैगंबरपुर में पटाखा बनाने के दौरान हुए विस्फोट ने आसपास के लोगों को दहशत में डाल दिया। धमाका इतना तेज था कि तीन मंजिला मकान देखते ही देखते धराशायी हो गया। विस्फोट के बाद करीब आधे घंटे तक इलाके में धूल का गुबार उठता रहा। 400 मीटर तक धमाके की आवाज सुनी गई।
धमाके का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है। आसपास के मकानों के शीशे टूट गए, जबकि कई घरों के दरवाजे क्षतिग्रस्त हो गए। टूटे शीशों की चपेट में आने से पड़ोस के लोगों को मामूली चोटें आईं। अजय केसरी, जानकी देवी, महेश गुप्ता, सुमन केसरी और रामपोस मौर्य है। धमाके के बाद इलाके में अफरातफरी मच गई। लोग अपने घरों से बाहर निकल आए और अपनों की सलामती जानने में जुट गए। कुछ मकानों की दीवारों में दरारें आने से लोगों में भय व्याप्त हो गया।
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बगल के मकान भी हुए क्षतिग्रस्त।
- फोटो : अमर उजाला
अचानक हुए इस हादसे ने आसपास रहने वाले परिवारों की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े कर दिए। पड़ोसियों ने बताया कि पटाखा बनाने की पूरी जानकारी पुलिस चौकी को थी। शिकायत पर पुलिस आती और खानापूर्ति कर लौट जाती थी। इसके बाद राजू खान पड़ोसियों को धमकाता था। कहता कि तुम्ही लोग पुलिस से शिकायत करते हो। दीपावली समेत अन्य पर्व को लेकर राजू खान ने पटाखा बनाने का बड़ी खेप जुटाई थी। दिन और रात दो शिफ्ट में काम होता था। तीन साल पहले राजू खान के घर पुलिस ने छापेमारी की थी। खबर थी कि पांच लाख का माल पकड़ा गया था लेकिन इसका खुलासा नहीं हुआ। वहीं दूसरी ओर घटना से सहमे लोगों का हाल चाल जानने के लिए भाजपा नेता सोमनाथ विश्वकर्मा समेत अन्य लोग पहुंचे।
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अपनी बेटी के साथ घायल महिला।
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10 साल पहले पितरकुंडा में भी हुआ था भीषण विस्फोट
पैगंबरपुर में पटाखा विस्फोट की घटना ने दस साल पहले अक्तूबर में हुए हादसे की यादें ताजा कर दीं। पितरकुंडा में में पटाखा विस्फोट में छह लोगों की जान चली गई थी। हादसे में सरफराज, आमना, उसकी बेटी जेबा, शबा और 13 साल की बच्ची निम्मो उर्फ शीबा की मौत हो गई थी। इसके बावजूद पटाखा बनाने और उसके भंडारण पर पुलिस की कार्रवाई ना के बराबर है। स्थानीय लोगों के बीच इस बात को लेकर चर्चा रही कि आखिर ऐसे हादसों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी कदम क्यों नहीं उठाए गए।
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सुरक्षा व्यवस्था संभालती पुलिस।
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मलबा हटाने में लगा 5 घंटे का समय
हादसे के बाद दमकल, एनडीआरएफ की टीम ने रेस्क्यू अभियान शुरू किया। स्थानीय लोगों को आशंका थी कि हादसे में राजू खान और उसकी मां साथ ही छोटी बेटी भी दबी है। ऐसे में बचाव कार्य को युद्धस्तर पर किया गया। हादसे में केवल राजू की पत्नी उसका बेटा और बेटी ही घायल हुए। मामले की जांच में एटीएस भी जुट गई है। पूर्व के मामलों को एजेंसियां खंगालने में जुटी है। वहीं दूसरी तरफ पुलिस ये पता लगाने में जुटी है कि राजू खान कब से यहां पटाखा बना रहा था। माल कब और कहां से आता था।
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मलबा हटाने में लगे पांच घंटे।
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100 से ज्यादा पुलिसकर्मियों ने राहत बचाव कार्य का संभाला मोर्चा
सारनाथ थाना क्षेत्र के पैगंबरपुर में बृहस्पतिवार को अवैध पटाखा बनाने के दौरान हुए भीषण विस्फोट में तीन मंजिला मकान भरभराकर ढह गया। धमाके की चपेट में आने से मकान में मौजूद चांदनी बेगम (35) और बेटा आदिल खान (14) गंभीर रूप से घायल हो गए। जबकि दस साल की बच्ची अरफिया भी घायल हुई है। तीनों को पुलिस ने मंडलीय अस्पताल पहुंचाया। मां और बेटे की हालत गंभीर है। मां करीब 85 फीसदी झुलस गई है जबकि बेटे के सिर में गंभीर चोट आई है।
विस्फोट इतना तेज था कि आसपास के छह अन्य मकान भी क्षतिग्रस्त हो गए। कई घरों के शीशे और दरवाजे टूट गए, जबकि कुछ इमारतों में दरारें आ गईं। अचानक हुए विस्फोट से दहशत में आए लोग अपने-अपने घर छोड़कर बाहर निकल आए।