बिजनौर में धार्मिक संस्थान विष्णुलोक के ज्योतिषविद पंडित ललित शर्मा के अनुसार महाशिवरात्रि पर त्रयोदशी तिथि दस मार्च को दोपहर दो बजकर 41 मिनट पर शुरू हो रही है। इस समय के बाद से महादेव का जलाभिषेक किया जा सकता है। महादेव के जलाभिषेक का श्रेष्ठ समय 11 मार्च को दोपहर दो बजकर 40 मिनट पर है।
महाशिवरात्रि पर बन रहा खास संयोग, ऐसे करें पूजा-अर्चना, होगी हर मनोकामना पूरी
पंडित ललित शर्मा के अनुसार महाशिवरात्रि के दिन ही देवों के देव महादेव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। इस साल 11 मार्च को त्रयोदशी और चतुर्दशी का मिलन हो रहा है। इसलिए महाशिवरात्रि 11 मार्च को मनाना श्रेष्ठ रहेगा। दस मार्च को दोपहर दो बजकर 41 मिनट पर त्रयोदशी तिथि प्रारंभ होगी।
त्रयोदशी और चतुर्दशी का मिलन 11 मार्च को दोपर दो बजकर 40 मिनट पर होगा। इस बार महाशिवरात्रि शुभ संयोग में मनाई जाएगी। महाशिवरात्रि पर शिव योग के साथ घनिष्ठा नक्षत्र होगा और चंद्रमा मकर राशि में विराजमान रहेंगे। इसलिए महाशिवरात्रि पर्व की पूजा विधि विधान से पूजन करना कल्याणकारी माना जा रही है।
महाशिवरात्रि को वर्ष भर में पड़ने वाली सिद्ध रात्रियों में से एक माना गया है। इस दिन ब्रह्मांण में दिव्य ऊर्जाएं चरम पर होती हैं। इसलिए शिवरात्रि पर की गई पूजा अर्चना, जप, दान आदि का फल कई गुना प्राप्त होता है। हिंदू पंचांग के अनुसार 27 योग में से एक योग प्रतिदिन उपस्थित रहता है। इन 27 योग में से एक योग शिव योग भी है जिसे परम कल्याणकारी और भोलेनाथ की पूजा के लिए श्रेष्ठ माना गया है। कहा कि महादेव शरीर पर चिता की भस्म लगाते हैं, रुद्राक्ष की माला धारण करते हैं और नंदी की सवारी करते हैं। भूत, प्रेत, निशाचर उनका अनुसरण करते हैं।
विभत्स रूप धारण करने के बाद भी उन्हें मंगलकारी कहा जाता है और वे पल भर की सच्ची उपासना से भी प्रसन्न हो जाते हैं। महाशिवरात्रि पर बेल पत्र का तीन दलों से युक्त एक बिल्ब पत्र जो भगवान शिव को अर्पित करता है उसके तीन जन्मों के पाप धुल जाते हैं। शिवरात्रि के दिन शिव स्तुति, शिव सहस्रनाम, शिव चालीसा, रुद्राष्टकम, शिव पुराण, शिव पंचाक्षर आदि का पाठ करना चाहिए।
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