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बिल्सी कांड: योगेंद्र सागर ने भाजपा में ही तय किया अर्श से फर्श का सफर, सपा-बसपा से भी रहा ऐसा कनेक्शन
Sun, 31 Oct 2021 01:19 PM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, बरेली
अमर उजाला नेटवर्क, बरेली
Published by: शाहरुख खान
Updated Sun, 31 Oct 2021 01:19 PM IST
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पूर्व विधायक को उम्रकैद की सजा
- फोटो : अमर उजाला
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पूर्व विधायक योगेंद्र सागर का राजनीतिक सफर लंबा होने के साथ विवादों से घिरा रहा। पहली बार वह 1993 के मध्यावधि चुनाव में भाजपा से बिल्सी विधायक चुना गया था। 1996 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने बसपा सुप्रीमो मायावती के खिलाफ चुनाव मैदान में उतारा। इस चुनाव में वह मायावती से करीब दो हजार वोट से हार गया । इसके बाद भाजपा में इसका कद बढ़ गया था। लेकिन कल्याण सिंह के भाजपा छोड़ते ही स्थिति खराब होने लगी। 2007 में बसपा के टिकट पर विधायक बना। बसपा ने 2016 में निष्कासित कर दिया। इसके बाद फिर भाजपा में शामिल हो गया। बसपा से गठबंधन के दौरान जब कल्याण सिंह सरकार बनाने में कामयाब हो गए तो योगेंद्र सागर को भाजपा सरकार में लाल बत्ती से नवाजा गया। वह 1997 से 2000 के बीच आईटीआर का चेयरमैन (दर्जा राज्यमंत्री) भी रहा। कल्याण सिंह के भाजपा छोड़ने के बाद योगेंद्र सागर की भाजपा से दूरियां बढ़ गईं। 2007 का चुनाव आते-आते योगेंद्र सागर ने बसपा में गोटियां सेट कर लीं।
पूर्व विधायक को उम्रकैद की सजा
- फोटो : अमर उजाला
इस बार वह बिल्सी क्षेत्र से बसपा के टिकट पर विधायक चुना गया। 2007 से 2012 के बीच प्रदेश में बसपा सरकार के दौरान योगेंद्र सागर की तूती बोलती रही। यही वह दौर था, जब अप्रैल 2008 में उन पर अपहरण और सामूहिक दुष्कर्म का आरोप लगा।
बसपा सुप्रीमो मायावती।
- फोटो : amar ujala
बसपा सरकार के दौरान अक्तूबर 2008 विवेचना ट्रांसफर कराने के बाद वह सीबीसीआईडी से मामले में फाइनल रिपोर्ट लगवाने में भी कामयाब हो गया, लेकिन पीड़ित पक्ष ने प्रोटेस्ट कर दिया। इस दौरान योगेंद्र सागर बसपा में ही बना रहा । 2012 में उसने अपनी पत्नी प्रीति सागर को बिसौली विधानसभा क्षेत्र से बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ाया, लेकिन उसको शिकस्त मिली।
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पूर्व विधायक को उम्रकैद की सजा
- फोटो : अमर उजाला
2017 के चुनाव में वह बसपा से ही बेटे कुशाग्र सागर को विधायक का चुनाव लड़ाने के लिए प्रयासरत था। टिकट न मिलता देख उसने भाजपा से नजदीकियां बढ़ाईं। इसके बाद अप्रैल 2016 में उसको बसपा से निष्कासित कर दिया गया। 2017 के चुनाव में योगेंद्र सागर के बेटे कुशाग्र सागर को भाजपा के टिकट पर बिसौली विधानसभा क्षेत्र से प्रदेश में सबसे कम उम्र का विधायक चुना गया।
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पूर्व विधायक को उम्रकैद की सजा
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भाजपा में अर्श पर और भाजपा में ही फर्श पर आया सागर
अपहरण और सामूहिक दुष्कर्म के मामले में दोषी करार दिए गए योगेंद्र सागर के राजनीतिक सफर पर गौर करें तो भाजपा में ही उसने अपने राजनीतिक सफर का स्वर्णिम काल देखा। पहली बार भाजपा के टिकट पर विधायक चुना गया। 2007 में जरूर बसपा के टिकट पर विधायक चुना गया, लेकिन फिर से भाजपा में वापसी कराकर 2017 के चुनाव में अपने बेटे कुशाग्र सागर को बिसौली से टिकट दिलाने के साथ विधायक बनवाने में भी कामयाब हो गया।
अपहरण और सामूहिक दुष्कर्म के मामले में दोषी करार दिए गए योगेंद्र सागर के राजनीतिक सफर पर गौर करें तो भाजपा में ही उसने अपने राजनीतिक सफर का स्वर्णिम काल देखा। पहली बार भाजपा के टिकट पर विधायक चुना गया। 2007 में जरूर बसपा के टिकट पर विधायक चुना गया, लेकिन फिर से भाजपा में वापसी कराकर 2017 के चुनाव में अपने बेटे कुशाग्र सागर को बिसौली से टिकट दिलाने के साथ विधायक बनवाने में भी कामयाब हो गया।