कार्तिक कृष्ण पक्ष की अमावस्या पर रविवार को दीपपर्व दीपावली धूमधाम से मनाई जाएगी। शुभ मुहूर्त में लक्ष्मी-गणेश और इंद्र-कुबेर का पूजन सभी प्रकार से शुभतादायी रहेगा जबकि तांत्रिक उपासक निशीथकाल यानी अर्द्धरात्रि में की जाएगी। नए कार्य की शुरुआत के साथ ही पुराने व्यापार में लक्ष्मी-गणेश के साथ ही खाता पूजन भी किया जाएगा।
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diwali in prayagraj
- फोटो : प्रयागराज
अमावस्या तिथि 27 अक्तूबर को दिन में 11.51 बजे से आरंभ होकर सोमवार को सुबह 9.44 बजे तक रहेगी। लक्ष्मी पूजा के लिए अबकी स्थिर लग्न में तीन मुहूर्त मिल रहे हैं और तीनों ही व्यापारिक दृष्टि से पूजन के लिए शुभतादायी है। रविवार को प्रदोष काल शाम 5.11 बजे से शाम 7.48 बजे तक है। लेकिन प्रदोष काल व्यापिनी स्थिर लग्न वृष शाम 6.21 बजे से रात 8.18 बजे तक है।
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ऐसे में अमावस्या के साथ ही प्रदोष काल के उत्तम योग के कारण यह मुहूर्त गृहस्थों और कारोबारियों, दोनों के पूजन के लिए श्रेष्ठ है। इस अवधि में लक्ष्मी-गणेश के साथ ही बही खातों का पूजन भी किया जाएगा। इससे पहले स्थिर लग्न कुंभ दिन में 1.44 से 3.15 बजे बजे तक है।
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ज्योतिर्विद दिवाकर त्रिपाठी पूर्वांचली के मुताबिक रात 11.50 बजे से भोर में 3.04 बजे तक अमावस्या व्यापिनी महानिशीथ काल में स्थिर लग्न सिंह है, जो कालीपूजा के लिए उत्तम मुहूर्त है। इसी अवधि में तांत्रिक और काली उपासना की जाएगी। अमावस्या व्यापिनी महानिशीथ काल के साथ ही स्थिर लग्न सिंह कालीपूजा के लिए सर्वोत्तम है। वैसे सभी स्थिर लग्नों में गृहस्थ और कारोबारी, दोनों ही लक्ष्मी-गणेश पूजन कर सकते हैं।
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ऐसे करें लक्ष्मी पूजन
ज्योतिर्विद डॉ.गिरिजाशंकर शास्त्री के अनुसार अमवास्या पर लक्ष्मी पूजन के लिए ‘श्रीं’ या ‘ऊं श्री महालक्ष्यै नम:’ मंत्र का जाप फलदायी है।