सदी की सबसे भयावह बीमारी बन चुके कोरोना का खौफ अब नैनी में भी दिखने लगा है। यहां केंद्रीय कारागार नैनी से लेकर शिक्षण संस्थानों तक में इसका डर इस कदर समाया हुआ है कि अब बड़े ही नहीं बच्चे भी आपसी दोस्ती में गले लगना और हाथ मिलाने की परंपरा से इतर नमस्ते, प्रणाम के दौर में आ गए हैं।
वहीं केंद्रीय कारागार नैनी में बंद तकरीबन 4500 कैदी और करीब 250 जेल कर्मी और ज्यादा सतर्कता बरत रहे हैं। यहां तक कि अपने बच्चों, पत्नी एवं मां-बाप से मिलाई के दौरान भी एक सामान्य दूरी बनाकर कैदी मिल रहे हैं।
जेल प्रशासन की ओर इसके लिए लगातार कैदियों को जागरूक किया जा रहा है। प्रदेश की सबसे बड़ी जेलों में शामिल केंद्रीय कारागार नैनी इकलौती ऐसी जेल है, जहां सजायाफ्ता और विचाराधीन कैदी दोनों एक साथ रहते हैं। जिनकी संख्या तकरीबन 4500 के आस-पास है।
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कोरोना वायरस(सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : pixabay
इसमें जम्मू काश्मीर, बांग्लादेश, पाकिस्तान, नेपाल जैसे देशों से पकड़े गए खूंखार आतंकवादियों समेत कई संगीन अपराधी एवं सामान्य कैदी हैं। इनसे मिलाई करने के लिए देश के अलावा विदेश से भी लोग आते जाते रहते हैं। कोरोना के संक्रमण का खौफ सुनने के बाद यहां जेल प्रशासन भी अलर्ट मोड में आ गया है।
कैदियों एवं बंदियों को बता दिया गया है कि जो लोग उनसे मिलने आ रहे हैं, उनसे एक निर्धारित दूरी बनाकर रखें। खाने पीने की वस्तुओं को प्रयोग करने से पहले धुल ले। आपस में भी हाथ मिलाने और गले मिलने से परहेज करे। बदले में नमस्ते, प्रणाम करें और बहुत जरूरी हो तो पैर छू लें, क्योंकि पैर छूने से भी इसका संक्रमण फैलने का डर न के बराबर रहता है। ऐसा विशेषज्ञों का कहना है।
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कोरोना वायरस(सांकेतिक तस्वीर)
जेल में प्रशासन ने मांगे पांच हजार मास्क
जेल प्रशासन ने एहतियातन पांच हजार मास्क मंगाया है, जो जेल अधिकारियों एवं कर्मचारियों से लेकर कैदियों तक को वितरित किया जाना है, लेकिन फिलहाल इतनी बड़ी संख्या में मास्क प्रयागराज में उपलब्ध न होने की वजह से लखनऊ से संपर्क किया गया है। वरिष्ठ जेल अधीक्षक हरिबक्श सिंह ने बताया कि साफ सफाई का ध्यान रखा जा रहा है। कैदियों और उनसे मिलने आने वालों को भी इस बारे में एहतियात बरतने को कहा गया है।