फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

कुंभ मेले में दिखे विलुप्त होने वाली सभ्यता के लोग, इनकी भाषा सुनकर नहीं होगा विश्वास

Mon, 21 Jan 2019 05:37 PM IST
kapil kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज Published by: kapil kumar Updated Mon, 21 Jan 2019 05:37 PM IST
विज्ञापन
kumbh mela 2019 extinct arya civilization people meet in prayagraj with rare language
kumbh

संगमनगरी प्रयागराज के भव्य कुंभ में यूं तो भारतीय संस्कृति की तमाम विविधताएं और सभ्यताएं देखने को मिल रही हैं लेकिन मेले में जम्मू-कश्मीर के लद्दाख से आए आर्यन लोग सभी के लिए आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। सिर पर रंग-बिरंगे फूलों से सजी टोपी, गले में मोतियों व धातुओं से बनी हार और लद्दाखी पारंपरिक वेशभूषा में आप इन्हें मेले में कहीं भी देख सकते हैं। ये यहां करीब 30 की संख्या में आये हुए हैं।

Trending Videos
kumbh mela 2019 extinct arya civilization people meet in prayagraj with rare language
kumbh

वे कुंभ मेले में अपनी पारम्परिक नृत्य और लोकगीत से लोगों को आकर्षित कर रहे हैं। पूछने पर बताते हैं कि वे इस नृत्य के जरिये कुंभ महापर्व की खुशी मना रहे हैं और लोगों को भी प्रसन्न रहने का संदेश दे रहे हैं।

kumbh mela 2019 extinct arya civilization people meet in prayagraj with rare language
kumbh

वे दावा करते हैं कि वे ही शुद्ध आर्य हैं और आज भी उनमें सिंधु घाटी सभ्यता की झलक देखी जा सकती है। फिलहाल इनकी कुल जनसंख्या 4 हजार से भी कम है ये विलुप्त होने के कगार पर हैं। ये आर्यन लोग दर्दशिना भाषा बोलते हैं, साथ में ही आए लुंदुप दुरजु कहतें है कि यह भाषा कई भारतीय भाषाओं की जननी है, देव भाषा संस्कृत का जन्म भी इसी भाषा से हुआ हुआ है।

विज्ञापन
विज्ञापन
kumbh mela 2019 extinct arya civilization people meet in prayagraj with rare language
kumbh

ये बौद्ध धर्म का भी पालन करते हैं और इसके बावजूद ये लोग देवी-देवताओं की पूजा करते हैं और कुदरती ताकतों पर विश्वास करते हैं। सूर्य, अग्नि और पेड़-पौधों की पूजा भी ये करते हैं। ये आर्यन घाटी के लोग प्रकृति से अत्यंत प्रेम करते हैं। इनके अनुसार बाकी लद्दाखी भाषाओं से इतर इनकी जुबान में संस्कृत के 70 से 80 प्रतिशत शब्द मिलते हैं।इन्हें लद्दाख के स्थानीय लोग 'ब्रोकपा' और 'डोपा' नाम से पुकारते हैं वहां की भाषा में इसका मतलब घुमन्तु या खानाबदोश होता है।

विज्ञापन
kumbh mela 2019 extinct arya civilization people meet in prayagraj with rare language
kumbh

शिक्षा की उचित व्यवस्था न होने से अधिकांश लोग अशिक्षित ही रह जाते हैं।लुंदुप दुरुजु के लफ्ज़ों में 'रोज़ी-रोटी के साथ ही अपनी संस्कृति को बचाए रखना आज हमारे लिए सबसे बड़ा मसला है। इनकी कमाई का सबसे बड़ा जरिया या तो खुबानी की बागवानी, फलों की खेती-बाड़ी या फिर सेना और बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन से मिलने वाली मजदूरी है।

अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed