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विश्व नदी दिवस: ताजमहल के पीछे सबसे प्रदूषित है यमुना, नालों का पानी गिरने से हुई 'जहरीली'

Sun, 26 Sep 2021 12:06 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क अमर उजाला, आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Sun, 26 Sep 2021 12:06 AM IST
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World River Day News Yamuna is the most polluted behind Taj Mahal
ताजमहल के पीछे यमुना में गंदगी - फोटो : अमर उजाला

आगरा में ताजमहल के पीछे यमुना नदी सबसे ज्यादा प्रदूषित है। यहां इसके पानी का रंग काला दिखता है। यमुना नदी का यह रंग नालों के सीधे गिरने, सीवर और औद्योगिक कचरे के कारण है। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की इस साल की रिपोर्ट बताती है कि यमुना नदी आगरा में प्रवेश के स्थल कैलाश घाट से ताजमहल तक पहुंचते-पहुंचते तीन गुना ज्यादा प्रदूषित हो रही है। 



दयालबाग से मंटोला नाले के बीच शहर के 91 बड़े नाले और 350 से ज्यादा छोटी नालियां यमुना को ‘जहरीला’ बना चुकी हैं। सीवर नेटवर्क और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट पर 48 करोड़ रुपये प्रति साल खर्च करने के बाद भी वीए टेक वबाग यमुना में सीवर पहुंचने से नहीं रोक पाई है। मानसून के तीन महीनों में भी यमुना में प्रदूषण की स्थिति में ज्यादा सुधार नहीं हुआ। यमुना का पानी न पीने लायक है न नहाने और सिंचाई लायक बचा है। विश्व नदी दिवस पर पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट... 

World River Day News Yamuna is the most polluted behind Taj Mahal
आगरा में बुलंदशहर से आता है गंगाजल - फोटो : अमर उजाला

500 किमी लंबी नदियों का जाल लेकिन 130 किमी दूर से ला रहे गंगाजल
आगरा जिले में यमुना, चंबल समेत नदियों की कुल लंबाई 500 किमी से ज्यादा है लेकिन पीने के शुद्ध पानी के लिए आगरा 130 किमी दूर बुलंदशहर के पालड़ा फॉल से लाए जा रहे गंगाजल पर निर्भर है। गंगाजल पाइपलाइन के जरिए आगरा तक लाने में 2900 करोड़ रुपये खर्च हुए। 

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ताजमहल के पीछे यमुना में गंदगी - फोटो : अमर उजाला

आगरा की नदियों का अध्ययन कर रहे बॉयोडायवर्सिटी रिसर्च एंड डेवलपमेंट सोसायटी (बीआरडीएस) के अध्यक्ष डॉ. केपी सिंह ने बताया कि आगरा से लुप्त हो रही नदियों में वर्ष 1990 तक भरपूर पानी रहता था। जिले की मुख्य नदियों में से केवल चंबल में ही सालभर पानी रहता है। यमुना नाले में तब्दील हो चुकी है। करवन, खारी, उटंगन, किवाड़, पार्वती नदी का अस्तित्व खतरे में है। करवन नदी हाथरस से औद्योगिक अपशिष्ट लेकर झरना नाले के नाम से यमुना नदी में मिलती है। इसमें रसायनों का झाग भरा रहता है।

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उटंगन नदी (फाइल) - फोटो : अमर उजाला

नदियों के सूखने से ग्रामीण क्षेत्रों में गहराया जलसंकट
केपी सिंह के मुताबिक नदियों के सूखने का शहर से ज्यादा असर ग्रामीण क्षेत्रों पर पड़ा है। शहर में यमुना और गंगाजल की आपूर्ति है। देहात में नदियों के अलावा जलापूर्ति का कोई स्रोत नहीं। नदियां सूखने से शमसाबाद में एक मीटर, फतेहाबाद में 6 मीटर, सैंया ब्लाक में 11.50 मीटर तक भूजल स्तर की गिरावट आई है। इन ब्लाक में खारी और उटंगन नदी हैं। अछनेरा ब्लॉक में नहरों के कारण भूजल स्तर में सबसे कम 54 सेमी की गिरावट आई है।

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ताजमहल के पीछे यमुना में गंदगी - फोटो : अमर उजाला
'राष्ट्रीय नदी आयोग स्थापित किया जाए'
बीआरडीएस के अध्यक्ष केपी सिंह ने बताया कि राष्ट्रीय नदी आयोग की स्थापना कर नदियों के संरक्षण और बहाव की नीति तैयार की जाए। नदियों को पुनर्जीवित करने के लिए प्रयास किए जाएं। 

'चेकडैम बनाकर नदियों में पानी लाएं'
जल विशेषज्ञ राजीव सक्सेना ने कहा कि आगरा की नदियों को पुनर्जीवित कर पानी का प्रबंधन किया जाए तो गंगाजल की जरूरत न पड़े। पूरे साल के लिए पानी पर्याप्त मिलता रहेगा। चेकडैम बनाकर उटंगन, किबाड़, खारी नदियों में फिर से पानी लाया जा सकता है।
 
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