सावन के चौथे सोमवार को शाहगंज स्थित पृथ्वीनाथ महादेव मंदिर बम बम भोले के जयकारों से गूंजता है। इस दिन यहां भव्य मेले का भी आयोजन होता है। इस मंदिर में भगवान शिव अपने परिवार के साथ विराजमान हैं। यहां सावन मास में शिव को जल चढ़ाने का विशेष महत्व है। इसके अलावा इस मंदिर में छोटे महादेव और हनुमानजी विराजमान हैं।
पेड़ की जड़ में मिला था शिवलिंग
मंदिर के महंत अजय राजौरिया के अनुसार मान्यता है कि यहां घना जंगल हुआ करता था। एक बार पृथ्वीराज चौहान यहां से गुजर रहे थे। उन्होंने यहां आराम करने का मन बनाया और अपना घोड़ा बांध दिया, लेकिन घोड़ा खुल गया। बहुत प्रयास किया पर घोड़ा बांध नहीं पाए। वृक्ष में किसी प्रेत की छाया की आशंका से पृथ्वीराज ने पेड़ को उखड़वा दिया। पेड़ की जड़ से शिवलिंग जकड़ा हुआ था। उन्होंने उस जगह की खुदाई कराई, लेकिन शिवलिंग का छोर नहीं मिला। पृथ्वीराज ने स्थल की सफाई कराई।
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महंत अजय राजोरिया
- फोटो : अमर उजाला
प्रभु से क्षमा याचना करते हुए मंदिर की स्थापना कराई। इसी वजह से इस मंदिर का नाम पृथ्वीनाथ महादेव पड़ा। बाद में व्यापारियों ने मंदिर का जीर्णोद्धार कराया। सावन के चौथे सोमवार को यहां मेले आयोजन होता है।
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पृथ्वीनाथ महादेव मंदिर
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शायद ही दुनिया में दूसरा ऐसा कोई शिवलिंग होगा, जिसमें भगवान शिव और उनका परिवार एक ही शिवलिंग में शामिल हो। शिवलिंग में एक तरफ भगवान गणेश, दूसरी ओर माता पार्वती और आगे की तरफ नंदी की प्रतिमा साफ देखने को मिलती है। शिवलिंग का यह अद्भुत नजारा पृथ्वीनाथ महादेव मंदिर की शिवलिंग में देखने को मिलता है।
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पृथ्वीनाथ महादेव मंदिर में पूजा करते श्रद्वालु
- फोटो : अमर उजाला
लगता है मेला
पृथ्वीनाथ महादेव मंदिर पर वैसे तो श्रावण मास के चारों सोमवार को पूजा अर्चना और अभिषेक होता है, लेकिन श्रावण मास के आखिरी सोमवार को यहां पर मेले का आयोजन किया जाता है।
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पृथ्वीनाथ महादेव मंदिर में पूजा करते श्रद्वालु
ऐसे पहुंचें मंदिर
भोगीपुरा चौराहा से फतेहपुर सीकरी रोड पर थोड़ा आगे चलने पर सड़क किनारे ही मंदिर दिखाई दे जाएगा।