आगरा के कूंचा साधूराम में चार लोगों की हत्या का आरोपी संतोष राठौर रेखा का रिश्ते का भाई है। रेखा के पिता विनोद राठौर की बुआ रतनदेवी सीता नगर में रहती हैं। संतोष रतन देवी के बेटे बादाम सिंह का बेटा है। उसकी परचून की दुकान है। पुलिस के अनुसार आरोपियों से पूछताछ में पता चला कि संतोष ने रेखा से दो लाख रुपये का कर्ज लिया था। इसके अलावा भी कभी दस हजार तो कभी पांच हजार लेकर जाता रहा। इसके बाद रेखा ने उसे अपना स्कूटर भी बेच दिया था। संतोष ना तो कर्ज में लिए रुपये लौटा रहा था और न ही स्कूटर की पूरी रकम अदा कर रहा था। इसी को लेकर रेखा से उसकी अनबन हो गई थी। रेखा उसे फोन करके तगादा कर रही थी। उससे कहा था कि वह मकान बेचकर दिल्ली जाना चाहती है। इसलिए रुपयों की जरूरत है। संतोष के पास कर्ज चुकाने के लिए रुपये नहीं थे। उसने रेखा की हत्या की साजिश रची। बता दें कि बुधवार-गुरुवार को कूंचा साधूराम के एक घर में चार शव मिले थे, जिसके बाद पुलिस परिचित पर हत्या करने का शंक जता रही थी।
मां-बच्चों की हत्या का खुलासा: कर्ज की रकम का तगादा करने से नाखुश था संतोष, ऐसे दिया सनसनीखेज हत्याकांड को अंजाम
संतोष को उम्मीद थी कि रेखा के घर में पांच से छह लाख रुपये और पति के चांदी के जेवरात मिल जाएंगे। उसने अपने दोस्तों अंशुल और वीरू से बात की। उन्हें बराबर का हिस्सा देने का वादा किया। संतोष ने अपने दोस्तों को मकान दिलाने का झांसा देकर रेखा से घर का गेट खुलवाया। मौका पाकर रेखा, वंश, पारस और माही की कैंची और चाकू से गला रेतकर हत्या कर दी। इसके बाद घर में लूटपाट की। वारदात के अगले दिन वह बस से चित्रकूट भाग गए। अंशुल और वीरू कबाड़े का काम करते हैं।
आईजी रेंज नवीन अरोरा ने बताया कि रेखा से संतोष ने दो लाख रुपये उधार लिए थे। वादा किया था कि वह ब्याज सहित लौटा देगा। मगर, ऐसा नहीं किया। इसके बाद रेखा से छह महीने पुराना स्कूटर भी ले लिया था। पूरी रकम नहीं दी। दो लाख रुपये और स्कूटर की रकम के लिए रेखा तगादा कर रही थी। संतोष ने अपनी दुकान के लिए पहले से कर्ज ले रखा था। इस कारण वो रेखा को रकम नहीं लौटा पा रहा था। रेखा के तगादे से बचने और अपना कर्ज चुकाने के लिए रेखा और उसके बच्चों की हत्या की साजिश रची, जिससे घर में आसानी से लूट कर सके। उसने अपने पड़ोसी अंशुल को शामिल किया, कहा कि जो पैसे और जेवरात मिलेंगे, उसे बांट लेगा। इसके बाद वीरू को भी अपने साथ कर लिया।
रेखा के स्कूटर से आए थे तीनों
योजना के तहत तीनों रेखा की एक्टिवा पर धूलिया गंज तक आए। धूलिया गंज पर स्कूटर खड़ा करके तीनों पैदल रेखा के घर पहुंचे। संतोष ने दरवाजा खटखटाया। रेखा के बेटे वंश उर्फ टुकटुक ने दरवाजा खोला। संतोष ने कहा कि यह मकान देखने आए हैं। टुकटुक ने मां से पूछा। रेखा ने तीनों को नीचे ही कमरे में बैठाने के लिए बोल दिया। वह पूजा कर रही थी। टुकटुक बाजार से कपूर, फूल, कलावा, समोसे लेकर आया। वहीं दूसरी तरफ रेखा ने तीनों को ऊपर बुला लिया। संतोष नींद की गोलियां लेकर गया था। संतोष ने रेखा से कहा कि वह दवाई लाया है। यह डॉक्टर ने दी हैं, इससे शरीर का दर्द कम हो जाएगा। उसने रेखा को दूध में गोलियां दे दीं। बातचीत के दौरान बच्चों को भी दूध में नींद की गोलियां मिलाकर दे दीं। मगर, सभी को गोलियों का असर कम हुआ। वह बेहोश नहीं हुए।
सबसे पहले रेखा को मारा, बाद में टुकटुक को
रेखा ने पारस और माही को नीचे खेलने के लिए भेज दिया। रेखा चाय बनाने लगी। आरोपियों को डर था कि चाय पीने से कप पर कहीं फिंगर प्रिंट नहीं आ जाएं। इसलिए उन्होंने बहाना बनाकर चाय के लिए मना कर दिया, तब तक रेखा चाय बनाने के लिए रख चुकी थी। वीरू और अंशुल सोफे पर बैठे थे। रेखा किसी काम से अपने कमरे में गई। पीछे से संतोष भी कमरे तक पहुंच गया। उसने रेखा को पकड़ लिया। उससे पूछा कि माल कहां है। रेखा डर गई, उसने शोर मचाने का प्रयास किया। संतोष ने उसका मुंह दबाया और गर्दन में कैंची घुसेड़ दी। रेखा छटपटाने लगी। पलंग से नीचे गिर पड़ी। इसी बीच टुकटुक बाजार से लौटा। उसे मां की आवाज सुनाई पड़ी। वह ऊपर आया। संतोष के साथियों ने उसे पकड़ने का प्रयास किया। वह नीचे भागा, उसका चश्मा गिर पड़ा। अंशुल और वीरू उसे पकड़ कर स्टोर रूम में ले गए। वहां चाकू से टुकटुक का गला रेत दिया। पारस और माही नीचे थे। संतोष को लगा कि इन दोनों को जिंदा छोड़ा तो ये पुलिस को बता देंगे। संतोष के कहने पर अंशुल और वीरू दोनों बच्चों को ऊपर ले आए। हत्यारोपियों ने उन्हें बेड पर पर मार डाला।