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Mulayam Singh Yadav: जिस नेता को हराया, उसी को बना दिया एमएलसी, पढ़ें एटा के राजनीतिक इतिहास की रोचक घटना

Tue, 11 Oct 2022 02:31 PM IST
धीरेन्द्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Tue, 11 Oct 2022 02:31 PM IST
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Mulayam Singh Yadav defeated leader made him MLC etah news
पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव - फोटो : अमर उजाला
समाजवादी पार्टी के संरक्षक नेताजी मुलायम सिंह यादव ने जहां अपने राजनीतिक पैंतरों से विरोधियों को चारों खाने चित किया तो समय-समय पर उन्हें सहारा भी दिया। ऐसा ही रोचक किस्सा एटा से जुड़ा हुआ है। 


1993 में जब नई पार्टी के रूप में समाजवादी पार्टी का गठन कर चुनाव लड़ने के लिए मुलायम सिंह ने निधौली कलां विधान सभा सीट से पर्चा भरा, तो उनके विरोधी उम्मीदवार के रूप में सुधाकर वर्मा (भाजपा) खड़े हो गए। यह सीट लोधी बाहुल्य थी और उस समय राम मंदिर मुद्दे को लेकर भाजपा की लहर भी थी। ऐसे में सुधाकर वर्मा काफी मजबूती से चुनाव लड़े और मुलायम सिंह के लिए जीत कठिन कर दी थी। हालांकि अंत में जीत मुलायम सिंह यादव की ही हुई। इस चुनाव के साथ ही सुधाकर वर्मा उनके राजनीतिक विरोधियों में शुमार हो गए थे। लेकिन ऐसा नहीं था कि उनसे व्यक्तिगत दुश्मनी मानने लगे हों। 
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पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव - फोटो : अमर उजाला
लखनऊ में कई बार उनसे मुलाकात होती थी और वह सुधाकर वर्मा को मिलने आने के लिए बुलावा भी देते थे। समय बदलने के साथ परिस्थितियां बदलीं और भाजपा के मजबूत नेता सुधाकर वर्मा ने भी पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के साथ पार्टी छोड़ दी। 
 
Mulayam Singh Yadav defeated leader made him MLC etah news
मुलायम सिंह यादव - फोटो : अमर उजाला।
बाद में कल्याण सिंह ने राष्ट्रीय क्रांति पार्टी का गठन किया, जिसमें सुधाकर वर्मा भी शामिल हुए। वफादारी का इनाम 2003 में उन्हें मिला। यह वो दौर था जब मुलायम सिंह और कल्याण सिंह नजदीकियां बढ़ रही थीं। सपा सरकार में मुलायम सिंह मुख्यमंत्री थे। 
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पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव - फोटो : अमर उजाला
इसी दौरान स्थानीय प्राधिकारी एमएलसी चुनाव की घोषणा हुई। दो सदस्य वाली एटा-मथुरा-मैनपुरी सीट के लिए कल्याण सिंह ने सिफारिश की तो मुलायम सिंह ने एक सीट सुधाकर वर्मा के लिए छोड़ दी, जबकि दूसरी सीट पर मैनपुरी के तत्कालीन सपा जिलाध्यक्ष अवधेश यादव लड़े थे। दोनों ही लोग चुनाव जीतकर एमएलसी चुने गए।
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पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
सुधाकर वर्मा कहते हैं कि दल और राजनीति तो लोकतंत्र में चलती रहती है, इन सबसे अलग हटकर मुलायम सिंह यादव सर्वमान्य नेता थे। उनके जाने से प्रदेश और देश को बहुत बड़ी क्षति हुई है। 
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