ताजनगरी में बंदरों के उत्पात के कारण सोमवार को दो लोगों की मौत हो गई। यह पहली घटना नहीं है, इससे पहले बंदरों के उत्पात से चार साल में पांच लोगों की जान जा चुकी है। ताजमहल में सैलानियों पर भी हमले हो चुके हैं। इसके बावजूद प्रशासन ने इन्हें पकड़वाने की योजना नहीं बनाई है। दस से ज्यादा कॉलोनियों में लोगों ने बंदरों से बचने के लिए लंगूर किराए पर रखे हैं। पुलिस लाइन में भी लंगूर रखे गए हैं। सुभाष पार्क के सामने बैंक कॉलोनी में विजिलेंस के दफ्तर के पास ही लंगूर बांधा गया है। कमला नगर, बल्केश्वर में भी यही स्थिति है। दिल्ली रोड पर जूता फैक्टरियों में लंगूर गेट पर ही बंधे रहते हैं।
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ताजनगरी में बंदरों का आंतक, चार साल में गई सात लोगों की जान, सैलानी भी हो चुके हैं घायल
Tue, 06 Oct 2020 02:10 PM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Tue, 06 Oct 2020 02:10 PM IST
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ताजमहल में बंदर (फाइल)
- फोटो : Amar Ujala
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बंदरों से बचाव के लिए मकान में लगा जाल
- फोटो : अमर उजाला
घर पर लगवाए लोहे के जाल
रावतपाड़ा, बेलनगंज, जीवनी मंडी, कमला नगर, बल्केश्वर, जयपुर हाउस, भरतपुर हाउस सहित आधे से ज्यादा शहर में बंदरों का इतना डर है कि हजारों लोगों ने घरों के ऊपर लोहे का जाल लगवा लिया है । कलक्ट्रेट में दफ्तरों में भी लोहे के जाल लगवाए गए हैं। पुलिस का रिकार्ड बंदर फाड़ चुके हैं। तब दो साल पहले लोहे का चैनल लगवाया गया था।
रावतपाड़ा, बेलनगंज, जीवनी मंडी, कमला नगर, बल्केश्वर, जयपुर हाउस, भरतपुर हाउस सहित आधे से ज्यादा शहर में बंदरों का इतना डर है कि हजारों लोगों ने घरों के ऊपर लोहे का जाल लगवा लिया है । कलक्ट्रेट में दफ्तरों में भी लोहे के जाल लगवाए गए हैं। पुलिस का रिकार्ड बंदर फाड़ चुके हैं। तब दो साल पहले लोहे का चैनल लगवाया गया था।
आगरा में बंदरों को आतंक
- फोटो : अमर उजाला
बंदरों के उत्पात से पहले भी जा चुकी जान
1 मार्च 2020 में शाहगंज के आजमपाड़ा में बेटी को बचाने छत पर गए उस्मान पर बंदरों ने हमला कर दिया था। इस दौरान उस्मान छत से गिर गए थे। उनकी मौत हो गई थी।
2. जुलाई 2019 में माईथान में हरिशंकर गोयल पर बंदरों ने हमला कर दिया। बंदरों के हमले में उनकी मौत हो गई।
3. नवंबर 2018 में रुनकता में बालक को मां की गोद से एक बंदर उठाकर ले गया था। इसके बाद उसे मार डाला था।
4. सितंबर 2017 में इससे पहले एमजी रोड पर एक अधिवक्ता की बाइक के आगे बंदर आ गए थे। उनकी मौत हो गई थी।
5. फरवरी 2017 में रावली में भी एक व्यक्ति की बंदरों के हमले में मौत हो गई थी।
1 मार्च 2020 में शाहगंज के आजमपाड़ा में बेटी को बचाने छत पर गए उस्मान पर बंदरों ने हमला कर दिया था। इस दौरान उस्मान छत से गिर गए थे। उनकी मौत हो गई थी।
2. जुलाई 2019 में माईथान में हरिशंकर गोयल पर बंदरों ने हमला कर दिया। बंदरों के हमले में उनकी मौत हो गई।
3. नवंबर 2018 में रुनकता में बालक को मां की गोद से एक बंदर उठाकर ले गया था। इसके बाद उसे मार डाला था।
4. सितंबर 2017 में इससे पहले एमजी रोड पर एक अधिवक्ता की बाइक के आगे बंदर आ गए थे। उनकी मौत हो गई थी।
5. फरवरी 2017 में रावली में भी एक व्यक्ति की बंदरों के हमले में मौत हो गई थी।
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आगरा का सराफा बाजार
- फोटो : अमर उजाला
सराफा बाजार में कर चुके पांच लाख का नुकसान
सराफा स्वर्णकार एसोसिएशन के अध्यक्ष राजू मेहरा ने बताया कि किनारी बाजार में करीब 500 सराफा कारोबारियों की दुकानें हैं। सभी कारोबारी बंदरों से परेशान हैं। बंदर सीसीटीवी की दिशा घुमा जाते हैं, तो कभी तारें काट जाते हैं। अब तक अनुमानित 5 लाख रुपये का नुकसान कर चुके हैं।
शिकायत की, फिर भी नहीं पकड़वाए
घटिया आजम खां के लोगों का कहना है कि दो महीने पहले ही नगर निगम में शिकायत की थी। शाम को रोज बंदरों के झुंड आते हैं। लॉकडाउन में इन्हें खाना नहीं मिला, तब और ज्यादा उत्पात किया। राजीव, राजेंद्र, हरीश ने बताया कि वे अपर नगर आयुक्त से मिले थे और बंदरों को पकड़वाए जाने की मांग की थी।
सराफा स्वर्णकार एसोसिएशन के अध्यक्ष राजू मेहरा ने बताया कि किनारी बाजार में करीब 500 सराफा कारोबारियों की दुकानें हैं। सभी कारोबारी बंदरों से परेशान हैं। बंदर सीसीटीवी की दिशा घुमा जाते हैं, तो कभी तारें काट जाते हैं। अब तक अनुमानित 5 लाख रुपये का नुकसान कर चुके हैं।
शिकायत की, फिर भी नहीं पकड़वाए
घटिया आजम खां के लोगों का कहना है कि दो महीने पहले ही नगर निगम में शिकायत की थी। शाम को रोज बंदरों के झुंड आते हैं। लॉकडाउन में इन्हें खाना नहीं मिला, तब और ज्यादा उत्पात किया। राजीव, राजेंद्र, हरीश ने बताया कि वे अपर नगर आयुक्त से मिले थे और बंदरों को पकड़वाए जाने की मांग की थी।
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सड़क पर बंदरों का आतंक
- फोटो : अमर उजाला
योजना : बंदरों को शहर से ले जाकर कीठम में रखा जाएगा
कीठम के जंगल में भालू संरक्षण केंद्र के पास 33 हेक्टेयर जंगल मे खूंखार बंदरों को रखने के लिए रेस्क्यू सेंटर बनाया जाएगा। बंदरों के बंध्याकरण की जगह इन्हें रेस्क्यू सेंटर बनाकर रखा जाएगा, जिसमे मथुरा और आगरा के दो हजार से ज्यादा अल्फा (टोली का नेतृत्व करने वाला) बंदर होंगे। बड़े-बड़े पिंजरे बनाकर इन खूंखार बंदरों को रखा जाएगा। इसके लिए मंगलवार को सेंट्रल जू अथॉरिटी दिल्ली में वाइल्डलाइफ एसओएस प्रस्ताव लेकर जा रहा है।
कीठम के जंगल में भालू संरक्षण केंद्र के पास 33 हेक्टेयर जंगल मे खूंखार बंदरों को रखने के लिए रेस्क्यू सेंटर बनाया जाएगा। बंदरों के बंध्याकरण की जगह इन्हें रेस्क्यू सेंटर बनाकर रखा जाएगा, जिसमे मथुरा और आगरा के दो हजार से ज्यादा अल्फा (टोली का नेतृत्व करने वाला) बंदर होंगे। बड़े-बड़े पिंजरे बनाकर इन खूंखार बंदरों को रखा जाएगा। इसके लिए मंगलवार को सेंट्रल जू अथॉरिटी दिल्ली में वाइल्डलाइफ एसओएस प्रस्ताव लेकर जा रहा है।