वृंदावन कुंभ मेले में आस्था के विविध रूप देखने को मिल रहे हैं। कहीं पंडालों में भजन-कीर्तन हो रहा है तो कहीं अखाड़ों के साधु धूनी रमाए बैठे हैं। कोई कितना भी पुकारे, साधना में लीन इन साधुओं को कोई फर्क नहीं पड़ता। साधना समाप्त होने के बाद ही वह अपने आसन से उठते हैं। साधना भी इतनी कठिन कि देखने वाला भी चकित हो जाए। अगली स्लाइड्स में देखिए इन हठयोगियों की साधना...
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वृंदावन कुंभ: धूनी साधना कर रहा साधु
- फोटो : अमर उजाला
वृंदावन कुंभ में तपस्वी खालसे में अयोध्या के खाक चौक के कई संत अपनी धूनी रमाए बैठे हैं। महंत भगवतदास ने बताया कि तपस्वी खालसे में बाबा भंडारी, मलखान बाबा, विजयरामदास सहित कई संत वृंदावन की इस पावन धरा पर लगे कुंभ में जनकल्याण की भावना लिए अपनी साधना में लीन हैं।
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वृंदावन कुंभ बैठक: साधुओं ने रमाई धूनी
- फोटो : अमर उजाला
महंत भगवतदास ने धूनी साधना के संबंध में बताया कि यह कई प्रकार की होती है। पहली पंच धूनी साधना। इसमें पांच ओर से अग्नि प्रज्वलित बीच में साधु अपनी साधना करते हैं। इसके बाद आठ धूनी और बारह धूनी साधना भी इसी प्रकार होती है।
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वृंदावन कुंभ: मेला क्षेत्र में धूनी रमाए बैठे साधु
- फोटो : अमर उजाला
चौरासी धूनी साधना कठिन होती है। इसमें चौरासी स्थानों पर अग्नि प्रज्जवलित कर साधु बीच में बैठकर साधना करता है। इस साधना में साधु इतना लीन हो जाता है कि उसे संसार से कोई मतलब नहीं रह जाता। कोई कितना भी पुकारे जब तक साधना पूरी नहीं होगी, साधु अपना स्थान नहीं छोड़ सकता।
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वृंदावन कुंभ: मेला क्षेत्र में धूनी रमाए बैठे साधु
- फोटो : अमर उजाला
धूनी साधनाओं में सबसे कठिन सिर पर अग्नि प्रज्जवलित कर साधना करना होता है। इसमें साधु चारों ओर अग्नि में घिरे होने के बाद मटके में अग्नि जलाकर बीच में बैठकर साधना करते हैं। यह साधना बहुत कठिन है। कई साधु 18 वर्ष से इस साधना को अनवरत कर रहे हैं।