आगरा और मथुरा समेत पूरे ब्रज में मौसम का पारा चढ़ा हुआ है, जिससे सुबह नौ बजे से ही सूरज आग उगलने लगता है। दोपहर में तो आसमान से अंगारे बरसते हैं। इस कदर गर्मी पड़ रहा है कि इंसान ही नहीं पशु-पक्षी भी बेहाल हैं। ऐसे में मथुरा के फरह स्थित हाथी संरक्षण केंद्र में भीषण गर्मी से राहत पाने के लिए 'गजराज' गोता लगा रहे हैं। लगातार बढ़ते तापमान को देखते हुए वाइल्डलाइफ एसओएस ने हाथियों के लिए आजीवन देखभाल के तहत अद्भुत व्यवस्थाएं की हैं। एनजीओ के हाथी संरक्षण एवं देखभाल केंद्र में सभी 29 हाथियों के पास अपने स्वयं के जंबो स्विमिंग पूल के साथ-साथ पानी की छिड़काव के लिए स्प्रिंकलर भी हैं, जो कि उनके बड़े-बड़े बाड़ों को ठंडा रखने में मदद कर रहे हैं।
ब्रज में भीषण गर्मी से हाथी भी हुए बेहाल: राहत पाने के लिए स्विमिंग पूल में गोते लगा रहे 'गजराज'
संरक्षण केंद्र में हाथी अपने स्विमिंग पूल में समय बिताते हुए भरपूर आनंद लेते हैं। जहां बूढ़े हाथी, ठंडे ताजा पानी में आराम से घंटों बिताना पसंद करते हैं, वहीं कुछ हाथी जैसे की चंचल, पीनट, कोकोनट और लक्ष्मी ऐसे भी हैं, जो पानी में गोते लगाते हैं और पूल के अंदर रबर के टायरों के साथ खेलते हुए दिखाई देते हैं। यह पूल 400 वर्ग फीट और छह फीट गहरे हैं। इनके अंदर आसानी से जाने के लिए प्रत्येक पूल में एक झुका हुआ रैंप है। गर्मी से राहत प्रदान करने के अलावा पानी हाथियों के पैरों से अपने भारी वजन को कम करने में भी मदद करता है, जिससे उन्हें आराम करने में मदद मिल सके।
वाइल्डलाइफ एसओएस के मथुरा स्थित हाथी अस्पताल में हाथियों के लिए भारत का पहला जंबो हाइड्रोथेरेपी पूल भी है। हाइड्रोथेरेपी हाथियों के दर्द भरे जोड़ों और पैरों के लिए एक प्रभावी उपचार है, जो की पानी के चिकित्सीय लाभों का उपयोग करते हुए ट्रीटमेंट का ही एक रूप है, जिससे उन्हें शारीरिक रूप से आराम मिल सके। हाइड्रोथेरेपी मांसपेशियों के दर्द से राहत देने के साथ-साथ मांसपेशियों को प्राकृतिक तरीके से पुनर्निर्माण में मदद करता है। हाइड्रोथेरेपी पूल 11 फीट गहरा है और इसमें 21 हाई प्रेशर वाले जेट स्प्रे लगे हैं, जो पानी को प्रेशर से फेकते हैं, जिससे हाथियों के पैरों और शरीर की मालिश हो सके और रक्त संचार को बढ़ाने में मदद मिल सके।