शरद पूर्णिमा पर वृंदावन के ठाकुर बांकेबिहारी स्वर्ण-रजत सिंहासन पर विराजमान होकर राजभोग व शयनभोग के समय भक्तों को दर्शन देंगे। वर्ष में एक ही दिन मुरली बजाते बांकेबिहारी के दर्शन करने के लिए देश-दुनिया से हजारों श्रद्धालु वृंदावन पहुंच चुके हैं। वहीं शरद पूर्णिमा पर निधिवन में महारास का आयोजन किया जाएगा।
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बांकेबिहारी मंदिर
- फोटो : अमर उजाला
बांकेबिहारी मंदिर के सेवायत अशोक गोस्वामी ने बताया कि प्रात: 7.45 बजे बांकेबिहारी मोर मुकुट, श्वेत कटि कांछनी व बांसुरी धारण कर भक्तों को दर्शन देंगे। राजभोग आरती दोपहर 12.55 पर होगी। वहीं सांय 5.30 बजे बांकेबिहारी के दर्शन खुलेंगे। 10.25 बजे शयनभोग आरती होगी। शरद पूर्णिमा के दिन ठाकुर बांकेबिहारी को खीर, चंद्रकला आदि का भोग निवेदित किया जाएगा।
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
निधिवन में सायं 6.30 बजे से महारास का आयोजन किया जाएगा। सेवायत भिक्कीलाल गोस्वामी ने बताया कि स्वामी जी की साधना स्थली में महारास का कार्यक्रम अनूठा होगा। वहीं नगर के राधाबल्लभ मंदिर, सनेह बिहारी, प्रेम मंदिर, यशोदानंदन धाम, श्रीजी की बड़ी कुंज, शाहजी मंदिर आदि में ठाकुर जी धवल चांदनी में दर्शन देंगे।
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बांकेबिहारी मंदिर को जाने वाले रास्ते में भीड़
- फोटो : अमर उजाला
शरद पूर्णिमा से कार्तिक पूर्णिमा तक वृंदावन की एक माह की परिक्रमा आज से प्रारंभ हो जाएगी। कार्तिक नियम धारण करने वाले श्रद्धालु प्रात: 4 बजे से पंचकोसीय परिक्रमा देना प्रारंभ कर देंगे। इसके लिए देश-विदेश के हजारों श्रद्धालु तीर्थनगरी में पहुंचने लगे हैं। कुछ विदेशी भक्त आज से ब्रज चौरासी कोस की परिक्रमा भी प्रारंभ करेंगे।
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फाइल फोटो
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वृंदावन के सभी प्रमुख मंदिरों में कार्तिक पड़वा 14 अक्तूबर से लेकर 12 नवंबर तक दीपदान का आयोजन किया जाएगा। बांकेबिहारी के सेवायत अशोक गोस्वामी ने बताया कि बांकेबिहारी मंदिर में कार्तिक मास में एक माह तक 1100 दीपक प्रतिदिन बांकेबिहारी के समक्ष प्रज्ज्वलित किए जाते हैं। इसके लिए मंदिर प्रांगण में विशेष व्यवस्था की जाती है। श्रद्धालु भी इस दीपदान में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते हैं।