TRAI Sender ID Codes Meaning: आजकल साइबर फ्रॉड और ऑनलाइन ठगी के मामले बहुत तेजी से बढ़ रहे हैं। ठग अक्सर बैंक या सरकारी विभाग के नाम से फर्जी मैसेज भेजकर लोगों को अपना शिकार बनाते हैं। ऐसे में यह पहचानना बेहद जरूरी है कि आपके मोबाइल पर आया मैसेज असली है या फर्जी।
भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (TRAI) ने फर्जी मैसेजों को रोकने के लिए विशेष सेंडर आईडी और कोड नियम बनाए हैं। असली कंपनियां और बैंक हमेशा निर्धारित कोड के साथ मैसेज भेजते हैं, जबकि ठग सामान्य 10 अंकों वाले मोबाइल नंबर का उपयोग करते हैं। आइए इस लेख में समझते हैं कि इन सीक्रेट कोड्स से मैसेज की सच्चाई कैसे पहचानें।
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10 अंकों वाले नंबर से आए मैसेज पर न करें भरोसा
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10 अंकों वाले नंबर से आए मैसेज पर न करें भरोसा
- अगर आपके फोन पर किसी बैंक, बिजली विभाग या सरकारी योजना से जुड़ा मैसेज आया है और वह किसी सामान्य 10 अंकों के मोबाइल नंबर से भेजा गया है, तो वह शत-प्रतिशत फर्जी है।
- बैंक या सरकारी संस्थान कभी भी किसी व्यक्तिगत मोबाइल नंबर से आधिकारिक जानकारी या ओटीपी नहीं भेजते हैं।
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टेक्स्ट मैसेज का कोड पहचानें
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समझें P, S, T और G कोड का असली मतलब
- असली कंपनियों के मैसेज हेडर के अंत में TRAI द्वारा तय किए गए खास कोड लिखे होते हैं।
- उदाहरण के लिए, 'P' का मतलब प्रमोशनल यानी विज्ञापन होता है, 'S' का मतलब सर्विस अपडेट, 'T' का मतलब बैंक लेनदेन व ओटीपी, और 'G' का मतलब सरकारी योजनाओं से जुड़ा आधिकारिक संदेश होता है।
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संदिग्ध लिंक से रहें सावधान
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डराने वाली भाषा और संदिग्ध लिंक से रहें सावधान
- फर्जी मैसेजों में अक्सर लोगों को डराने की कोशिश की जाती है, जैसे "आपका बिजली कनेक्शन कट जाएगा" या "अकाउंट ब्लॉक हो जाएगा"।
- इसके साथ ही मैसेज में एक संदिग्ध लिंक भी दिया जाता है। किसी भी स्थिति में ऐसे अनजाने लिंक पर क्लिक न करें और न ही कोई जानकारी साझा करें।
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फर्जी मैसेज मिलने पर तुरंत यहां करें शिकायत
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फर्जी मैसेज मिलने पर तुरंत यहां करें शिकायत
- अगर आपको कोई फर्जी या संदिग्ध मैसेज मिलता है, तो उस पर कभी भरोसा न करें।
- आप इसकी शिकायत TRAI के 'चक्षु' पोर्टल पर जाकर दर्ज करा सकते हैं।
- इसके अलावा वित्तीय धोखाधड़ी होने पर तुरंत राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर अपनी शिकायत दर्ज कराएं।