Difference Between FIR And Complaint: अक्सर जब दो पक्षों के बीच में कोई विवाद होता है और बात थाने तक पहुंच जाती है तो 'शिकायत' और FIR की बातें सामने आने लगती हैं। ध्यान देने वाली बात यह है अधिकतर लोगों को शिकायत और एफआईआर के बीच में बुनियादी अंतर नहीं मालूम होता है। बता दें कि शिकायत और FIR दोनों में जमीन और आसमान का फर्क होता है।
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Know Your Rights: थाने में शिकायत करना और एफआईआर दर्ज कराने में क्या अंतर है? जान लें इसके पीछे की बारीकियां
Mon, 11 May 2026 07:50 PM IST
Shikhar Baranawal
यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Shikhar Baranawal
Updated Mon, 11 May 2026 07:50 PM IST
सार
Filing Fir Process:थाने में शिकायत दर्ज करने में और थाने में एफआईआर करने में जमीन-आसमान का अंतर होता है। ध्यान देने वाली बात यह है कि इसके बीच की बारिकियां बहुत कम लोग जानते हैं। इसलिए आइए इस लेख में इसी के बारे में समझते हैं।
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FIR और शिकायत दर्ज कराने में क्या अंतर है?
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क्या होती है शिकायत और यह एफआईआर से कैसे अलग है?
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क्या होती है शिकायत और यह एफआईआर से कैसे अलग है?
- किसी अपराध या समस्या की लिखित या मौखिक जानकारी जो आप पुलिस या मजिस्ट्रेट को देते हैं, उसे शिकायत कहते हैं।
- शिकायत छोटे (गैर-संज्ञेय) अपराधों के लिए भी हो सकती है, जबकि एफआईआर गंभीर (संज्ञेय) अपराधों के लिए दर्ज की जाती है।
- शिकायत मिलने पर पुलिस तुरंत जांच या गिरफ्तारी नहीं कर सकती, इसके लिए मजिस्ट्रेट की अनुमति की आवश्यकता होती है।
एफआईआर (FIR)के नियम
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एफआईआर (FIR)के नियम
- लूट, हत्या, या दुष्कर्म जैसे गंभीर मामलों में सीधे एफआईआर दर्ज की जाती है।
- एफआईआर दर्ज होते ही पुलिस को जांच शुरू करने और बिना वारंट आरोपी को गिरफ्तार करने और की शक्ति मिल जाती है।
- एफआईआर एक आधिकारिक दस्तावेज होता है जिसकी एक कॉपी शिकायतकर्ता के पास भी होनी चाहिए और उसका कानूनी अधिकार है।
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अगर पुलिस एफआईआर दर्ज करने से मना करे?
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अगर पुलिस एफआईआर दर्ज करने से मना करे?
- अगर थाना इंचार्ज एफआईआर दर्ज करने से मना करे, तो आप लिखित शिकायत एसपी या डीसीपी को भेज सकते हैं।
- आप धारा 156(3) के तहत मजिस्ट्रेट से पुलिस को एफआईआर दर्ज करने का आदेश देने की गुहार लगा सकते हैं।
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शिकायत की तारीख सही दें
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आम नागरिक को जरूर मालूम होनी चाहिए ये सावधानियां
- चाहे आप शिकायत दें या एफआईआर, हमेशा उसकी रिसीविंग या कार्बन कॉपी जरूर प्राप्त करें।
- हमेशा शिकायत में तारीख, समय और घटना का सही और स्पष्ट विवरण दें ताकि केस कमजोर न हो।
- गंभीर मामलों में किसी वकील से परामर्श लेना हमेशा बेहतर होता है ताकि सही के साथ प्रक्रिया आपका केस सही दिशा में बढ़ सके।