AC Gas: आखिर AC भीषण गर्मी में भी कमरे को कैसे बना देती है 'शिमला'? जानिए इसके पीछे का विज्ञान

Nitish Kumar
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीNitish Kumar
Sat, 23 May 2026 07:04 AM IST
सार

AC Gas Types:

भीषण गर्मी में एसी राहत तो देता है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इसकी ठंडी हवा के पीछे एक खास गैस काम करती है।आखिर एसी में कौन सी गैस होती है, यह कैसे काम करती है और गैस लीक होने पर क्या दिक्कतें आती हैं, आइए आसान भाषा में समझते हैं।

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which refrigerant gas is used in ac and how it Works
एसी - फोटो : एआई जनरेटेड

    भीषण गर्मी में एयर कंडीशनर (AC) हमारी सबसे बड़ी जरूरत बन जाता है। बाहर चाहे जितनी भी लू चल रही हो, एसी चंद मिनटों में तपते हुए कमरे को एकदम ठंडा कर देता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस शानदार कूलिंग के पीछे हवा नहीं बल्कि एक खास गैस का कमाल होता है? आइए आसान भाषा में समझते हैं।

    एसी में कौन सी गैस भरी जाती है?
    एसी में कौन सी गैस भरी जाती है? - फोटो : Adobe Stock

    एसी में कौन सी गैस भरी जाती है?

    एसी में जो गैस भरी जाती है, उसे तकनीकी भाषा में 'रेफ्रिजरेंट' (Refrigerant) कहा जाता है।

    मुख्य गैसों के प्रकार:

    R-32 गैस:

    यह सबसे आधुनिक और पर्यावरण के अनुकूल (पर्यावरण को कम नुकसान पहुंचाने वाली) गैस है। आजकल के ज्यादातर नए इन्वर्टर एसी में इसी का उपयोग होता है।

    R-410A गैस:

    यह भी एक लोकप्रिय गैस है जो पिछले कुछ वर्षों से नॉन-इन्वर्टर और इन्वर्टर एसी में काफी इस्तेमाल की जाती रही है।

    R-22 गैस:

    यह पुराने जमाने के एसी में भरी जाने वाली गैस थी। पर्यावरण को नुकसान (ओजोन परत को हानि) पहुंचाने के कारण अब इसका उपयोग लगभग बंद कर दिया गया है।

    एसी में गैस का क्या काम होता है?
    एसी में गैस का क्या काम होता है? - फोटो : Adobe Stock

    एसी में गैस का क्या काम होता है?

    एसी में भरी हुई इस गैस का मुख्य काम कमरे की गर्मी को सोखना और उसे बाहर फेंकना होता है। यह एक साइकिल की तरह काम करता है। जब एसी चलता है, तो यह रेफ्रिजरेंट गैस कमरे की गर्म हवा के संपर्क में आकर लिक्विड से गैस (भाप) में बदल जाती है। इसके बाद यह गैस एसी के कंप्रेसर में जाती है, जहां इसका दबाव और तापमान काफी बढ़ जाता है।

    फिर यह गैस बाहर लगे कंडेनसर कॉइल से गुजरते हुए अपनी सारी गर्मी हवा में छोड़ देती है और वापस ठंडी होकर लिक्विड बन जाती है। यही ठंडी हवा ब्लोअर के जरिए आपके कमरे में आती है और कमरा ठंडा हो जाता है।

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