सर्वे में बड़ा खुलासा: 81% मोबाइल यूजर्स हो रहे 'डार्क पैटर्न' का शिकार; Jio, Airtel और Vi पर उठे सवाल

नीतीश कुमार
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीनीतीश कुमार
Thu, 23 Jul 2026 12:35 AM IST
सार

Telecom Dark Pattern Survey:

देश में मोबाइल यूजर्स को भ्रामक रिचार्ज ऑपर्स, परेशान करने वाले नोटिफिकेशन और अतिरिक्त शुल्क जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। एक नए सर्वे में खुलासा हुआ है कि भारत के 10 में से 8 मोबाइल यूजर्स टेलीकॉम कंपनियों के 'डार्क पैटर्न' का शिकार हुए हैं। जानिए सर्वे में क्या सामने आया।

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डार्क पैटर्न - फोटो : Freepik

    भारत में 5G सेवाओं के तेजी से विस्तार और बढ़ते डिजिटल इस्तेमाल के बीच एक नया सर्वे टेलीकॉम कंपनियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है। कम्युनिटी प्लेटफॉर्म LocalCircles के देशव्यापी सर्वे के मुताबिक, 10 में से 8 से ज्यादा मोबाइल यूजर्स (81%) ने टेलीकॉम सेवाओं का इस्तेमाल करते समय कम से कम एक बार 'डार्क पैटर्न' यानी भ्रामक डिजिटल तरीकों का सामना किया है।

    यह सर्वे देश के 341 जिलों के 74,000 से अधिक मोबाइल उपभोक्ताओं की राय पर आधारित है। रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा नियम इन तरीकों को रोकने में पर्याप्त साबित नहीं हुए हैं। इसलिए TRAI और केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) से सख्त कार्रवाई की मांग की गई है।

    सबसे ज्यादा शिकायतें इन दो तरीकों की
    सबसे ज्यादा शिकायतें इन दो तरीकों की - फोटो : Freepik

    सबसे ज्यादा शिकायतें इन दो तरीकों की

    • सर्वे के अनुसार, सबसे बड़ी शिकायत 'बेट-एंड-स्विच' की रही। करीब 79% लोगों का कहना है कि उन्हें कम कीमत या बेहतर फायदे वाले रिचार्ज प्लान दिखाए गए, लेकिन भुगतान के समय वे उपलब्ध नहीं थे या उनकी जगह महंगे प्लान ऑफर किए गए।
    • वहीं 78% यूजर्स ने 'नैगिंग' की शिकायत की। उनका कहना है कि नोटिफिकेशन बंद करने के बावजूद बार-बार रिचार्ज, प्लान अपग्रेड या एप डाउनलोड करने के नोटिफिकेशन भेजे जाते हैं।
    छिपे चार्ज और ऑटो सब्सक्रिप्शन भी बने परेशानी
    छिपे चार्ज और ऑटो सब्सक्रिप्शन भी बने परेशानी - फोटो : AI

    छिपे चार्ज और ऑटो सब्सक्रिप्शन भी बने परेशानी

    • सर्वे में 59% लोगों ने बताया कि विज्ञापन में दिखाई गई कीमत से ज्यादा भुगतान करना पड़ा, क्योंकि बाद में प्रोसेसिंग या कन्वीनियंस फीस जोड़ दी गई। वहीं 53% यूजर्स ने आरोप लगाया कि एक बार खरीदी गई सेवाओं को उनकी जानकारी के बिना पेड सब्सक्रिप्शन में बदल दिया गया।
    • करीब 50% लोगों ने कहा कि ट्रांजैक्शन पूरा करने के लिए उन्हें अतिरिक्त सेवाएं खरीदने या जरूरत से ज्यादा निजी जानकारी साझा करने के लिए मजबूर किया गया।
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