Tim Cook: 28 साल में बनाया $4 ट्रिलियन का साम्राज्य, जानिए डूबते Apple की नैया पार लगाने वाले शख्स की कहानी
Tim Cook's 28-Year Journey At Apple:
एपल को 4 लाख करोड़ डॉलर के ऐतिहासिक शिखर पर पहुंचाने वाले दिग्गज सीईओ टिम कुक का 28 साल का सफर अब समाप्त हो रहा है। स्टीव जॉब्स के एक बुलावे पर डूबती एपल को संभालने वाले टिम कुक की इस इनसाइड स्टोरी में जानिए कि कैसे उन्होंने कंपनी की पूरी सप्लाई चेन को बदलकर उसे दुनिया का सबसे बड़ा ब्रांड बना दिया।

बात साल 1998 की है। कॉर्पोरेट जगत में कॉम्पैक (Compaq) उस वक्त कंप्यूटर बनाने वाली दुनिया की सबसे धाकड़ कंपनियों में से एक थी। उसी कंपनी में कॉर्पोरेट मैटेरियल्स के वाइस प्रेसिडेंट की एक बेहद सुरक्षित और आलीशान नौकरी छोड़कर एक 37 साल का शख्स उस एपल (Apple) का हाथ थामने चल दिया, जो उस दौर में लगभग दिवालिया होने की कगार पर खड़ी थी।
इस शख्स का नाम था टिम कुक। आज लगभग तीन दशकों तक एपल के साम्राज्य को संभालने और उसे इतिहास के सबसे ऊंचे शिखर पर पहुंचाने के बाद आखिरकार टिम कुक के इस ऐतिहासिक सफर का समापन होने जा रहा है। एपल के को-फाउंडर स्टीव जॉब्स के एक बुलावे पर शुरू हुई यह कहानी कैसे कॉरपोरेट इतिहास का सबसे बड़ा चमत्कार बन गई, आइए इसे करीब से समझते हैं।

एपल में आने से पहले कहां थे टिम कुक?
- टिम कुक के एपल में आने से पहले के सफर को देखें, तो उन्होंने ड्यूक यूनिवर्सिटी से एमबीए और ऑबर्न यूनिवर्सिटी से इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन किया था। एपल जॉइन करने से पहले वह आईबीएम (IBM) जैसी प्रतिष्ठित कंपनी में पूरे 12 साल बिता चुके थे, जहां वे नॉर्थ अमेरिकन फुलफिलमेंट के डायरेक्टर का पद संभाल रहे थे। इसके बाद उन्होंने इंटेलिजेंट इलेक्ट्रॉनिक्स में भी अपना हुनर दिखाया और फिर कॉम्पैक पहुंचे।
- कॉम्पैक में उन्हें काम करते हुए अभी एक साल भी पूरा नहीं हुआ था कि स्टीव जॉब्स ने उन्हें एक इंटरव्यू के लिए बुलाया। वह मुलाकात महज एक इंटरव्यू नहीं थी, बल्कि उसने टेक इतिहास का रुख ही बदल दिया। कुक ने अपनी जमी-जमाई नौकरी छोड़ एपल के उस अनिश्चित भविष्य में छलांग लगाने का एक ऐसा साहसी फैसला लिया, जिसने सबको हैरान कर दिया।

पर्दे के पीछे रहकर बदली काम करने की पूरी रफ्तार
- साल 1998 में जब टिम कुक ने एपल में कदम रखा, तो उन्हें ऑपरेशंस का सीनियर वाइस प्रेसिडेंट बनाया गया। उस दौर में एपल के पास खुद के बड़े-बड़े मैन्युफैक्चरिंग प्लांट हुआ करते थे, जो कंपनी के लिए एक बड़ा सफेद हाथी साबित हो रहे थे।
- कुक ने कमान संभालते ही सबसे पहले कंपनी के काम करने के पूरे ढर्रे को बदल कर रख दिया। उन्होंने इन-हाउस मैन्युफैक्चरिंग यानी खुद सामान बनाने के कारखाने बंद कर दिए और चीन के बड़े असेंबली पार्टनर्स के साथ कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग की एक नई शुरुआत की।
- इस मास्टरस्ट्रोक की वजह से एपल को बाजार की मांग के हिसाब से ढलने की गजब की आजादी मिल गई और गोदामों में सामान डंप रखने का झंझट हमेशा के लिए खत्म हो गया। कुक ने सप्लायर्स के साथ बेहद कड़े मोलभाव किए, जिससे एपल के प्रोडक्ट्स को बनाने की लागत में भारी कमी आई और पूरी सप्लाई चेन पर कंपनी का एकछत्र नियंत्रण स्थापित हो गया।
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