Walkie-Talkie: छोटा डिवाइस, बड़ा खतरा! अवैध वॉकी-टॉकी की बिक्री पर सरकार ने क्यों कसा शिकंजा?
Illegal Walkie Talkie Sale:
भारत सरकार ने मेटा, अमेजन और फ्लिपकार्ट समेत कई प्लेटफॉर्म्स पर अवैध वॉकी-टॉकी सेट बेचने के जुर्म में फाइन लगाया है। बिना अनुमति और नियमों के खिलाफ बेचे जा रहे वॉकी-टॉकी व रेडियो डिवाइस राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करते हैं।

भारत सरकार की केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने ई-कॉमर्स कंपनियों पर अवैध वॉकी-टॉकी बेचने पर कार्रवाई की है। प्राधिकरण ने मेटा, अमेजन और फ्लिपकार्ट समेत 8 नामी कंपनियों पर कुल 44 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। यह कार्रवाई इन प्लेटफॉर्म्स पर बिना लाइसेंस और नियमों का उल्लंघन कर वॉकी-टॉकी और पर्सनल मोबाइल रेडियो (PMR) डिवाइस बेचने के मामले में की गई है। सरकार ने ऑनलाइन फ्लेटफॉर्म्स पर खुलेआम बेचे जा रहे वॉकी-टॉकी सेट्स को नेशनल सिक्योरिटी के लिए खतरनाक बताते हुए पिछले साल ही कंपनियों को नोटिस जारी किया था। ऐसे में आइए जानते हैं एक छोटा-सा वॉकी-टॉकी देश की सुरक्षा के लिए कैसे खतरनाक साबित हो सकता है।

भारत में वॉकी-टॉकी को लेकर क्या नियम बनाए गए हैं?
भारत में वायरलेस उपकरणों का नियंत्रण 'वायरलेस प्लानिंग एंड कोऑर्डिनेशन' (WPC) विंग के हाथ में होता है। वॉकी-टॉकी के उपयोग के लिए स्पष्ट नियम बनाए गए हैं। आम नागरिक केवल PMR446 बैंड का ही इस्तेमाल कर सकते हैं, जिसकी फ्रीक्वेंसी 446.0 से 446.2 MHz के बीच होती है। इसके अलावा, डिवाइस की क्षमता 0.5 वॉट से ज्यादा नहीं होनी चाहिए और उसका एंटीना फिक्स्ड होना चाहिए। अगर कोई व्यक्ति इससे अधिक शक्तिशाली या दूसरी फ्रीक्वेंसी वाला डिवाइस इस्तेमाल करना चाहता है, तो उसे सरकार से 'ऑपरेटिंग लाइसेंस' लेना अनिवार्य है। इन नियमों का उल्लंघन करने पर भारी जुर्माना और जेल की सजा दोनों हो सकते हैं। इसके बावजूद, ऐसे डिवाइस को बेचने या आयात करने से पहले इक्विपमेंट टाइप अप्रूवल (ETA) सर्टिफिकेशन लेना अनिवार्य है, जो दूरसंचार विभाग द्वारा जारी किया जाता है। तय फ्रीक्वेंसी से बाहर काम करने वाले या बिना लाइसेंस वाले डिवाइस अवैध माने जाते हैं।

अवैध वॉकी-टॉकी से राष्ट्रीय सुरक्षा को क्या हैं खतरे?
अवैध या बिना अनुमति वाले वॉकी-टॉकी देश की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं। ऐसे डिवाइस अक्सर तय फ्रीक्वेंसी नियमों का पालन नहीं करते, जिससे पुलिस, सेना, आपदा प्रबंधन और अन्य इमरजेंसी सेवाओं के कम्युनिकेशन नेटवर्क में इंटरफेरेंस पैदा हो सकता है। संकट के समय अगर आधिकारिक संदेश बाधित हों, तो हालात और बिगड़ सकते हैं। इसके अलावा, गलत हाथों में पड़े वॉकी-टॉकी का इस्तेमाल गैरकानूनी गतिविधियों, दंगे-फसाद, तस्करी या आतंकी संचार के लिए भी किया जा सकता है, जिससे कानून-व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा दोनों पर असर पड़ता है। चूंकि, बिना लाइसेंस वाले वॉकी-टॉकी रजिस्टर्ड नहीं होते इसलिए इनका पता लगाना भी काफी मुश्किल होता है।
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