फ्रांस में लाखों कंप्यूटर होंगे Linux OS पर शिफ्ट: Microsoft Windows से दूरी की क्यों बना रहा यूरोप? जानिए वजह
Digital Sovereignty In France:
फ्रांस अपने सरकारी कामकाज से अमेरिकी कंपनियों का दबदबा खत्म करने जा रहा है। योजना के अनुसार, लाखों कंप्यूटर में माइक्रोसॉफ्ट विंडोज की जगह अब स्वदेशी और लिनक्स आधारित सिस्टम का इस्तेमाल होगा। यह कदम फ्रांस की 'डिजिटल संप्रभुता' हासिल करने की रणनीति का अहम हिस्सा है। आइए जानते हैं कि फ्रांस यह बड़ा बदलाव क्यों कर रहा है और इसका पूरी दुनिया पर क्या असर होगा।

फ्रांस इन दिनों एक बड़े तकनीकी बदलाव से गुजर रहा है। इसका लक्ष्य अमेरिकी टेक कंपनियों पर निर्भरता कम करके अपने डिजिटल सिस्टम पर खुद का नियंत्रण मजबूत करना। इसी योजना के तहत फ्रांस अब धीरे-धीरे माइक्रोसॉफ्ट विंडोज (Microsoft Windows) ऑपरेटिंग सिस्टम को सरकारी कंप्यूटर सिस्टम से हटाकर लिनक्स (Linux) आधारित ऑपरेटिंग सिस्टम अपनाने की तैयारी कर रहा है। यह बदलाव सिर्फ कंप्यूटर सिस्टम तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सरकार पूरी डिजिटल संरचना बदलना चाहती है।
इसमें डेटा स्टोरेज, क्लाउड सिस्टम, साइबर सिक्योरिटी, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, मैसेजिंग और एआई प्लेटफॉर्म तक शामिल हैं। यूरोप में इसे तकनीकी संप्रभुता की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

सिर्फ Windows नहीं, पूरी डिजिटल व्यवस्था बदलेगी
यह बदलाव करीब 25 लाख सरकारी कर्मचारियों को प्रभावित करेगा। शुरुआत फ्रांस की डिजिटल एजेंसी DINUM से होगी, जो सरकारी आईटी (IT) नीतियों को संभालती है। इसके बाद अलग-अलग मंत्रालय अपनी जरूरत के हिसाब से Linux सिस्टम अपनाएंगे। सरकार ने मंत्रालयों से 2026 तक रोडमैप तैयार करने को कहा है।
योजना में कई बड़े बदलाव शामिल हैं। सरकारी कंप्यूटरों में लिनक्स आधारित सिस्टम लाए जाएंगे। माइक्रोसॉफ्ट टीम्स की जगह “विजो” नाम का घरेलू वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग प्लेटफॉर्म इस्तेमाल होगा, जो कि ओपन-सोर्स फ्रेमवर्क पर आधारित है।
सुरक्षित सरकारी मैसेजिंग के लिए 'चैप' (Tchap) प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया जाएगा। वहीं सरकारी ऑफिस सॉफ्टवेयर के लिए 'ला सूट न्यूमरिके' नाम का ओपन-सोर्स ऑफिस सूट तैयार किया जा रहा है।

लिनक्स पर इतना भरोसा क्यों?
'लिनक्स' को इस बदलाव का सबसे अहम हिस्सा माना जा रहा है। इसकी सबसे बड़ी ताकत इसका ओपन-सोर्स होना है। यानी सरकार इसके कोड को देख, बदल और अपनी जरूरत के हिसाब से इस्तेमाल कर सकती है।
इसके उलट माइक्रोसॉफ्ट विंडोज जैसे सिस्टम पूरी तरह कंपनी नियंत्रित होते हैं। सरकारों के लिए यह चिंता का विषय बनता जा रहा है, क्योंकि सुरक्षा और डेटा नियंत्रण सीमित हो सकता है।
फ्रांस पहले भी लिनक्स का इस्तेमाल कर चुका है। फ्रांसीसी सुरक्षा बलों ने 2004 में लिनक्स आधारित 'गेंडबुंटू' सिस्टम अपनाया था। आज यह एक लाख से ज्यादा सिस्टम में इस्तेमाल हो रहा है।
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