Chip War: पश्चिम के वर्चस्व को सीधी चुनौती देगा चीन का 'सुपर मशीन', मैनहैटन प्रोजेक्ट से हो रही तुलना
China Develops EUV Lithography Machine:
चीन ने गुपचुप तरीके से अपनी पहली सेमीकंडक्टर चिप बनाने वाली EUV लिथोग्राफी मशीन का प्रोटोटाइप तैयार कर लिया है। पूर्व ASML इंजीनियरों की मदद से बनी यह मशीन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आधुनिक हथियारों के लिए जरूरी चिप बनाने में सक्षम है, जिससे चिप निर्माण के क्षेत्र में पश्चिमी देशों का एकाधिकार खत्म हो सकता है।

दुनिया में तकनीक की बादशाहत को लेकर चल रही खींचतान के बीच चीन ने एक ऐसी कामयाबी हासिल की है, जिसने पश्चिमी देशों की नींद उड़ा दी है। चीन के शेंझेन की एक हाई-टेक लैब में वैज्ञानिकों ने एक ऐसी मशीन का प्रोटोटाइप (नमूना) तैयार कर लिया है, जो दुनिया की सबसे एडवांस सेमीकंडक्टर चिप बना सकती है। यह वही तकनीक है जिसे रोकने के लिए अमेरिका ने कई वर्षों से पूरी ताकत झोंक रखी थी।

'मैनहट्टन प्रोजेक्ट' से हो रही तुलना
इस प्रोजेक्ट की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसकी तुलना यूएस के परमाणु बम बनाने वाले 'मैनहैटन प्रोजेक्ट' से हो रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस मिशन में नीदरलैंड की दिग्गज कंपनी ASML के पूर्व इंजीनियरों को शामिल किया गया है। इन विशेषज्ञों को फर्जी नामों और नकली आईडी कार्ड के साथ लैब में रखा गया है ताकि उनकी पहचान उजागर न हो सके।

क्या है यह तकनीक और क्यों है खास?
इस मशीन को EUV (एक्सट्रीम अल्ट्रावॉयलेट लिथोग्राफी) कहा जाता है। यह तकनीक इंसानी बाल से भी हजारों गुना पतली सर्किट लाइनों को सिलिकॉन की प्लेट पर उकेरती है। वर्तमान में इस तकनीक पर केवल डच कंपनी ASML का कब्जा है। जितनी बारीक सर्किट होगी, चिप उतनी ही पावरफुल होगी। चीन की यह मशीन फिलहाल अल्ट्रावॉयलेट लाइट पैदा करने में सफल रही है, हालांकि अभी इससे वर्किंग चिप निकलना बाकी है।
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