AI: अब सॉफ्टवेयर इंजीनियर नहीं, एआई कंपनियों को है इलेक्ट्रिशियन और प्लंबर की तलाश, रातों-रात बदली किस्मत

नीतीश कुमार
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीनीतीश कुमार
Mon, 19 Jan 2026 05:32 PM IST
सार

AI Skilled Labourer Demand:

एआई कंपनियां भले ही अच्छे सॉफ्टवेयर इंजीनियर्स और रिसर्चर्स पर करोड़ों खर्च कर रही हों, लेकिन अब इलेक्ट्रीशियन, प्लंबर और टेक्नीशियनों की कमी भी उन्हें खलने लगी है। AI डेटा सेंटर्स के तेजी से निर्माण ने स्किल्ड ट्रेड वर्कर्स की भारी मांग खड़ी कर दी है।

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डेटा सेंटर (सांकेतिक) - फोटो : AI जनरेटेड

    AI की दुनिया में टैलेंट वॉर की चर्चा आमतौर पर सॉफ्टवेयर इंजीनियरों और रिसर्च साइंटिस्ट्स तक सीमित रहती है। मेटा और ओपनएआई जैसी कंपनियां टॉप एआई टैलेंट को लुभाने के लिए करोड़ों डॉलर के पैकेज ऑफर कर रही हैं। लेकिन इस दौड़ का एक अहम पहलू अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। AI की इस रेस में तेज तर्रार सॉफ्टवेयर इंजीनियर्स की जरूरत तो पड़ रही है, लेकिन विशाल डेटा सेंटर्स को बनाने के लिए हुनरमंद इलेक्ट्रीशियन, प्लंबर और हीटिंग-कूलिंग टेक्नीशियन की मांग भी कई गुना बढ़ गई है।

    डेटा सेंटर
    डेटा सेंटर - फोटो : AI जनरेटेड

    कितनी गंभीर है समस्या

    अमेरिकी लेबर स्टैटिस्टिक ब्यूरो (BLS) के मुताबिक, एआई इंडस्ट्री में 2034 तक हर साल औसतन 81,000 इलेक्ट्रीशियन की कमी बरकरार रहेगी। अगले दशक में इलेक्ट्रीशियनों की संख्या में 9% की बढ़ोतरी का अनुमान है, जो ज्यादातर नौकरियों के औसत से कहीं ज्यादा है।

    वहीं, मैकिन्से (McKinsey) की एक रिपोर्ट और भी गंभीर तस्वीर दिखाती है। रिपोर्ट के अनुसार, 2030 तक अमेरिका को अतिरिक्त 1.3 लाख प्रशिक्षित इलेक्ट्रीशियन, 2.4 लाख कंस्ट्रक्शन लेबर और 1.5 लाख कंस्ट्रक्शन सुपरवाइजर की जरूरत पड़ेगी।

    डेटा सेंटर
    डेटा सेंटर - फोटो : AI जनरेटेड

    डेटा सेंटर्स के वजह से बढ़ी मांग

    देशभर में तेजी से बन रहे AI डेटा सेंटर्स इस मांग का बड़ा कारण माने जा रहे हैं। इंटरनेशनल ब्रदरहुड ऑफ इलेक्ट्रिकल वर्कर्स के मुताबिक, कई इलाकों में एक ही डेटा सेंटर प्रोजेक्ट के लिए मौजूदा यूनियन सदस्यों से दो से चार गुना ज्यादा वर्कर्स की जरूरत पड़ रही है। इस वक्त किसी भी एक इंडस्ट्री से ज्यादा वर्कफोर्स की मांग डेटा सेंटर्स से आ रही है। AI सिस्टम को चलाने के लिए भारी मात्रा में बिजली चाहिए, जिसके चलते ज्यादा मैनपावर की जरूरत पड़ रही है।

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