Car Data: स्मार्ट कारें प्राइवेसी में लगा रहीं सेंध, जानिए कैसे कर रहीं आपकी जासूसी

Nitish Kumar
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीNitish Kumar
Sun, 24 May 2026 06:30 PM IST
सार

Data Risk In Smart Cars:

आज की इंटरनेट से जुड़ी स्मार्ट कारें सिर्फ सफर आसान नहीं बना रहीं, बल्कि ड्राइवर की लोकेशन, आदतें, व्यवहार और निजी जानकारी भी रिकॉर्ड कर रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह डेटा बीमा कंपनियों तक पहुंच रहा है, जिससे आपका इंश्योरेंस प्रीमियम तक बढ़ सकता है। ऐसे में यह समझना जरूरी हो गया है कि आपकी कार आपके बारे में कितना कुछ जानती है।

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स्मार्ट कारें कर रहीं हैं जासूसी - फोटो : Freepik

    एक समय था जब कार चलाने को आजादी और प्राइवेट स्पेस की निशानी माना जाता था। लोग कार में बैठकर खुद को बाहरी दुनिया से अलग महसूस करते थे। लेकिन अब आधुनिक कारों की दुनिया पूरी तरह बदल चुकी है।

    आज की नई कारों को सिर्फ कार कहना सही नहीं होगा, बल्कि वे चार पहियों पर चलने वाले कंप्यूटर की तरह काम कर रही हैं। इनमें लगे सेंसर, कैमरे और इंटरनेट कनेक्टिविटी लगातार ड्राइवर और यात्रियों से जुड़ा डेटा इकट्ठा कर रहे हैं। कई बड़ी कंपनियां इस डेटा का इस्तेमाल कमाई के लिए भी कर रही हैं।

    कारें रिकॉर्ड कर रही हैं आपका निजी डेटा

    अगर कार कंपनियों की प्राइवेसी पॉलिसी को ध्यान से पढ़ा जाए तो पता चलता है कि ये कंपनियां सिर्फ ड्राइविंग डेटा ही नहीं, बल्कि बेहद निजी जानकारी भी रिकॉर्ड करती हैं।

    कारें यह जान सकती हैं कि आप कहां जा रहे हैं, आपके साथ कार में कौन बैठा है, आपने सीट बेल्ट लगाई या नहीं और आपने अचानक ब्रेक कब लगाया। यहां तक कि कार कितनी तेज चली और आपने कौन-सा रेडियो स्टेशन सुना, यह जानकारी भी रिकॉर्ड होती है।

    कुछ आधुनिक कारें इससे भी आगे निकल चुकी हैं। वे ड्राइवर का वजन, उम्र, चेहरे के भाव और व्यवहार से जुड़ी जानकारी भी स्टोर कर सकती हैं। कई कारों में ड्राइवर सीट की तरफ कैमरे लगे होते हैं, जो चेहरे और आंखों की गतिविधियों को ट्रैक करते हैं।

    बीमा कंपनियां खरीदती हैं डेटा
    बीमा कंपनियां खरीदती हैं डेटा - फोटो : Adobe Stock

    बीमा कंपनियों तक पहुंचा रहीं डेटा

    आज ज्यादातर नई कारें इंटरनेट से कनेक्टेड होती हैं। इसी वजह से कारें रियल टाइम में डेटा कंपनियों तक भेज सकती हैं। यानी जब आप सामान्य तरीके से गाड़ी चला रहे होते हैं, तब भी आपकी गतिविधियां रिकॉर्ड हो सकती हैं।

    विशेषज्ञों का कहना है कि यह सिर्फ प्राइवेसी का मामला नहीं है। इसका सीधा आर्थिक असर भी पड़ सकता है। कार कंपनियां इस डेटा को थर्ड पार्टी यानी बीमा कंपनियों को बेच देती हैं, जो इस डेटा को खरीदकर ड्राइवर की आदतों का विश्लेषण करती हैं और उसी आधार पर इंश्योरेंस प्रीमियम तय करती हैं।

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    अगर सिस्टम को लगता है कि ड्राइवर जोखिम भरे तरीके से गाड़ी चलाता है, तो बीमा प्रीमियम बढ़ाया जा सकता है।

    नए नियमों से बढ़ेगा डेटा कलेक्शन

    अमेरिका में एक नया संघीय कानून इस डेटा कलेक्शन को और बढ़ा सकता है। इसके तहत भविष्य की कारों में इंफ्रारेड बायोमेट्रिक कैमरे और एडवांस मॉनिटरिंग सिस्टम लगाए जा सकते हैं।

    इन सिस्टम्स की मदद से ड्राइवर की आंखों, चेहरे और व्यवहार को स्कैन किया जाएगा। इसका उद्देश्य यह पता लगाना होगा कि ड्राइवर थका हुआ है या नशे की हालत में है।

    हालांकि विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि इससे कंपनियों के पास लोगों की सेहत और निजी आदतों से जुड़ा बड़ा डेटा बैंक तैयार हो जाएगा। फिलहाल इस डेटा के इस्तेमाल को नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त नियम मौजूद नहीं हैं।

    कारों की प्राइवेसी पॉलिसी सबसे खराब
    कारों की प्राइवेसी पॉलिसी सबसे खराब - फोटो : Volkswagen

    कारों की प्राइवेसी पॉलिसी सबसे खराब- स्टडी

    साल 2023 में मोजिला ने 25 कार कंपनियों की प्राइवेसी पॉलिसी का अध्ययन किया। रिपोर्ट में कहा गया कि कोई भी कंपनी तय प्राइवेसी मानकों पर खरी नहीं उतरी।

    मोजिला ने कारों को “सबसे खराब प्राइवेसी वाले प्रोडक्ट्स” की कैटेगरी में रखा। रिपोर्ट के मुताबिक, कार कंपनियां नाम, उम्र, वजन, वित्तीय जानकारी, चेहरे के भाव और मनोवैज्ञानिक व्यवहार जैसी जानकारियां भी इकट्ठा कर सकती हैं।

    दक्षिण कोरियाई कंपनी किया (Kia) की प्राइवेसी पॉलिसी में यह तक उल्लेख था कि कंपनी संवेदनशील हेल्थ और निजी जीवन से जुड़ी जानकारी भी इकट्ठा कर सकती है। हालांकि, कंपनी ने कहा कि उसने ऐसा डेटा कभी संग्रहित नहीं किया और पॉलिसी सिर्फ कानूनी पारदर्शिता के लिए बनाई गई है।

    डेटा बेचने से बढ़ गया इंश्योरेंस प्रीमियम

    डेटा शेयरिंग का एक चर्चित मामला जनरल मोटर्स से जुड़ा सामने आया। आरोप लगा कि कंपनी ने ड्राइवर डेटा डेटा ब्रोकर कंपनी LexisNexis को बेचा। एक ड्राइवर ने दावा किया कि उसे अपनी ड्राइविंग हिस्ट्री से जुड़ी 130 पन्नों की फाइल मिली, जिसमें छह महीने की यात्राओं का पूरा रिकॉर्ड मौजूद था। बाद में उसका इंश्योरेंस प्रीमियम 21 फीसदी तक बढ़ गया।

    इस मामले में अमेरिकी फेडरल ट्रेड कमिशन ने कार्रवाई करते हुए जनरल मोटर्स पर पांच साल तक डेटा बेचने पर रोक लगा दी। हालांकि अन्य कंपनियां अब भी डेटा कारोबार में सक्रिय हैं।

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