Vidur Niti: इस संसार में मनुष्य एक ऐसा प्राणी है जो कभी संतुष्ट नहीं रहता है, उसके अंदर हमेशा कुछ नया पाने की या कुछ नया करने की लालसा बनी रहती है। किसी के पास साइकिल है तो वो बाइक खरीदने के बारे में सोचने लगता है और बाइक है तो कार खरीदने के बारे में सोचता रहता है। मनुष्य की इच्छाएं कभी खत्म नहीं होती हैं। हालांकि व्यक्ति के इस स्वभाव असर सकारात्मक और नकारात्मक दोनों तरह से होता है। हमेशा कुछ नया पाने की चाह के कारण इंसान या तो सुखी रहता है या दुखी। इंसान के इसी स्वभाव के बारे में महात्मा विदुर ने विस्तार से बताया है। विदुर जी ने बताया है कि इंसान के अंदर कुछ दोष होते हैं उसके सुख-दुख का कारण बनते हैं। व्यक्ति यदि इन दोषों को दूर कर ले तो जीवन में सफलता प्राप्त कर सकता है। चलिए जानते हैं इसके बारे में...
Vidur Niti: ऐसे लोग जीवन में हर सुख पाने के बाद भी रहते हैं दुखी
असंतोष
महात्मा विदुर कहते हैं कि जिस व्यक्ति के अंदर असंतोष की भावना होती है वह व्यक्ति सदैव दुखी रहता है। कुछ लोगों की आदत होती है कि उनके पास जितना है उतने में खुश न रहकर दूसरों की खुशी देखकर जलते रहते हैं। असंतुष्टता से ही ईर्ष्या की भावना का जन्म होने लगता है। इसलिए व्यक्ति के पास जितना है उतने में खुश रहना चाहिए।
ईर्ष्या
विदुर नीति के अनुसार जिसका स्वभाव ईर्ष्यालु होता है वह कभी सुखी नहीं रह पाता। अपने इस दोष के कारण वह सदैव दूसरों के सुख को देखकर मन ही मन में ईर्ष्या करता रहता है, जिसके कारण वह जीवन में मिलने वाले सुखों को भी सही प्रकार से नहीं भोगता है।
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जो लोग अपने मन में दूसरों के प्रति घृणा का भाव रखते हैं, वे हमेशा दुखी रहते हैं। घृणा का भाव रखने वाले व्यक्ति दूसरों से अच्छे संबंध नहीं रखते हैं, जिसके कारण अकेले रह जाते हैं और हमेशा दुखी होते रहते हैं।
क्रोध
महात्मा विदुर कहते हैं कि अधिक क्रोध करने वाला व्यक्ति भी हमेशा दुखी ही रहता है। जो लोग जरा सी बात पर क्रोध करने लगते हैं, वे गलत-सही की पहचान नहीं कर पाते हैं, जिसके कारण वे अपना ही अहित कर बैठते हैं। क्रोध में आकर कभी-कभी लोग दूसरों को दुख पहुंचा देते हैं जिसके लिए बाद में दुखी होते हैं।