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Anant Chaturdashi 2020: क्यों मनाते हैं अनंत चतुर्दशी, जानिए पूरी व्रत कथा

Tue, 01 Sep 2020 06:10 AM IST
Shashi Shashi ज्योतिष डेस्क,अमर उजाला
ज्योतिष डेस्क,अमर उजाला Published by: Shashi Shashi Updated Tue, 01 Sep 2020 06:10 AM IST
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अनंत चतुर्दशी 2020

अनंत चतुर्दशी पर भगवान विष्णु के अनंत अवतारों का पूजन किया जाता है। इसलिए इसे अनंत चतुर्दशी के नाम से जाना जाता है। इस व्रत को करने से व्यक्ति को अनेकों गुना ज्यादा शुभ फलों की प्राप्ति होती है। इस बार अनंत चतुर्दशी 1 सितंबर 2020 को मनाई जाएगी। आइए जानते हैं कि क्यों मनाते हैं अनंत चतुर्दशी, क्या है इसकी व्रत कथा..

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अनंत चतुर्दशी 2020

अनंत चतुर्दशी का व्रत सर्वप्रथम पांडवों द्वारा रखा गया था। जिसके बारे में एक कथा मिलती है। जब दुर्योदधन पांडवों से मिलने गया, तो माया महल का दृश्य देखकर धोखा खा गया। माया के कारण भूमि मानो जल के समान प्रतीत होती थी, और जल भूमि के समान... दुर्योधन ने भूमि को जल समझ कर अपने वस्त्र ऊपर कर लिए परंतु जल को भूमि समझ कर वह तालब में गिर गया। इस पर द्रोपदी ने उपहास करते हुए कहा “अंधे का पुत्र अंधा” इसी बात का प्रतिशोध लेने के लिए दुर्योधन ने अपने मामा शकुनी के साथ मिलकर षडयंत्र रचा, और पांडवों को जुए में पराजित करके भरी सभा में द्रोपदी का अपमान किया।

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अनंत चतुर्दशी 2020

पांडवों को बारह वर्ष का वनवास और एक वर्ष अज्ञात वास मिला, अपनी प्रतिज्ञा को पूरी करते हुए पांडव अनेक कष्टों को सहते हुए वन में रहने लगे। तब धर्मराज युधिष्ठिर ने भगवान कृष्ण से इस दुख को दूर करने का उपाय पूछा इस पर कृष्ण जी ने युधिष्ठिर से कहा कि जुआ खेलने के कारण लक्ष्मी तुमसे रुष्ट हो गई हैं, तुम अनंत चतुर्दशी के दिन भगवान विष्णु का व्रत रखो। इससे तुम्हारा राज-पाठ तुम्हें वापस मिल जाएगा। तब इस व्रत का महत्व बताते हुए श्रीकृष्ण जी ने उन्हें एक कथा सुनाई।

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अनंत चतुर्दशी 2020 व्रत कथा (प्रतीकात्मक तस्वीर)

अनंत चतुर्दशी व्रत कथा
बहुत समय पहले एक तपस्वी ब्राह्मण था जिसका नाम सुमंत और पत्नी का नाम दीक्षा था। उनकी सुशीला नाम की एक सुंदर और धर्मपरायण कन्या थी। जब सुशीला कुछ बड़ी हुई तो उसकी मां दीक्षा की मृत्यु हो गई। तब उनके पिता सुमंत ने कर्कशा नाम की स्त्री से विवाह कर लिया। जब सुमंत ने अपनी पुत्री का विवाह ऋषि कौंडिण्य के साथ किया तो कर्कशा ने विदाई में अपने जवांई को ईंट और पत्थर के टुकड़े बांध कर दे दिए। ऋषि कौडिण्य को ये व्यवहार बहुत बुरा लगा, वे दुखी मन के साथ अपनी सुशीला को विदा कराकर अपने साथ लेकर चल दिए, चलते-चलते रात्रि का समय हो गया।

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अनंत चतुर्दशी 2020

तब सुशीला ने देखा कि संध्या के समय नदी के तट पर सुंदर वस्त्र धारण करके स्त्रियां किसी देवता का पूजन कर रही हैं। सुशीला ने जिज्ञाशावश उनसे पूछा तो उन्होंने अनंत व्रत की महत्ता सुनाई, तब सुशीला ने भी यह व्रत किया और पूजा करके चौदह गांठों वाला डोरा हाथ में बांध कर ऋषि कौंडिण्य के पास आकर सारी बात बताई। ऋषि ने उस धागे को तोड़ कर अग्नि में डाल दिया। इससे भगवान अनंत का अपमान हुआ। परिणामस्वरुप ऋषि कौंडिण्य दुखी रहने लगे। उनकी सारी सम्पत्ति नष्ट हो गई और वे दरिद्र हो गए।

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