दशहरे के दिन मां दुर्गा पृथ्वी से अपने लोक वापस जाती हैं। इसलिए नौ दिनों की पूजा के बाद दसमी तिथि को मां की प्रतिमा के साथ अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमा को जल में वसर्जित कर दिया जाता है।
जल में देवी-देवताओं की मूर्तियों को क्यों विसर्जित किया जाता है?
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दुर्गा पूजा
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इसी तरह से हरेक देवी-देवता की पूजा के बाद उनकी प्रतिमा को जल में विसर्जित करने का विधान है। इसके पीछे कुछ ऐसी मान्यताएं हैं जिसके कारण सदियों से ऐसा होता आ रहा है। तो आइये जानें कि मूर्तियों को जल में क्यों विसर्जित किया जाता है।
जल में देवी-देवताओं की मूर्तियों को क्यों विसर्जित किया जाता है?
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दुर्गा विसर्जन
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जल पंचतत्वों में से एक माना जाता है जो परम पवित्र होता है। किसी भी पूजा पाठ में जल हाथ में लेकर ही शुद्धि का मंत्र पढ़ा जाता है और इसे अपने शरीर और पूजन साम्रगी पर छिड़का जाता है। पवित्रता के कारण देवी देवताओं को जल में विसर्जित किया जाता है।
जल में देवी-देवताओं की मूर्तियों को क्यों विसर्जित किया जाता है?
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दुर्गा पूजा
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शास्त्रों के अनुसार जल को ब्रह्म का स्वरूप कहा गया है। सृष्टि के आरंभ में और अंत में संपूर्ण सृष्टि में सिर्फ जल ही जल होता है। जल आरंभ, मध्य और अंत भी है इसलिए जल में त्रिदेवों का वास भी माना गया है। इसलिए देव कार्य में जल का प्रयोग किया जाता है।
जल में देवी-देवताओं की मूर्तियों को क्यों विसर्जित किया जाता है?
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दुर्गा पूजा
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जल बुद्घि और ज्ञान का प्रतीक होता है। जल के स्वामी देवता वरुण हैं जो विष्णु के ही अंश माने जाते हैं। इसलिए आदि अनंत भगवान विष्णु को देवी-देवताओं की मूर्तियां समर्पित कर दिया जाता है क्योंकि पुराणों के अनुसार इनसे ही सृष्टि का जन्म हुआ है यही सृष्टि के अंत में सबकुछ अपने में समेट लेते हैं।